मुख्यपृष्ठधर्म विशेषमहाकृपालु हैं माता

महाकृपालु हैं माता

-सच्चे भाव से स्मरण करने पर भक्तों के भय, दुख और संकट हरती हैं जगदंबा

शीतल अवस्थी

मां दुर्गा को शक्ति का प्रचंड स्वरूप माना जाता है, लेकिन अपने भक्तों के लिए वे अत्यंत करुणामयी और कृपालु हैं। वे दुष्ट शक्तियों का संहार करती हैं तो दूसरी ओर शरण में आए भक्तों को अभय, ज्ञान और संरक्षण प्रदान करती हैं। इसलिए उन्हें जगज्जननी, दयामयी और भक्तवत्सला कहा गया है।
देवी माहात्म्य में वर्णन है कि जब-जब देवताओं और मनुष्यों पर संकट आया, तब आदिशक्ति ने अलग-अलग स्वरूप धारण करके उनकी रक्षा की। महिषासुर से मुक्ति के लिए वे दुर्गा बनीं, रक्तबीज का अंत करने के लिए काली और शुंभ-निशुंभ के संहार के लिए चंडी स्वरूप में प्रकट हुईं।
भक्तों के लिए मां का सौम्य रूप
देवी का उग्र स्वरूप अधर्म और अन्याय के लिए है, भक्तों के लिए नहीं। श्रद्धापूर्वक उनकी शरण लेने वाले व्यक्ति को वे मां की तरह संभालती हैं। भक्त चाहे धनवान हो या निर्धन, विद्वान हो या सामान्य—देवी के दरबार में सच्ची भावना को ही प्रधान माना गया है।
उनकी करुणा का स्मरण करते हुए कहा गया है—
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
अर्थात शरण में आए दीन और दुखी प्राणियों की रक्षा करने वाली तथा सभी की पीड़ा हरने वाली देवी नारायणी को नमस्कार है।
भय और संकट में देवी का स्मरण
मान्यता है कि भय, असुरक्षा और कठिन परिस्थिति में मां दुर्गा का स्मरण मन को साहस देता है। श्रद्धालु *‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’* मंत्र का जाप कर सकते हैं। दुर्गा चालीसा, देवी कवच या दुर्गासप्तशती के चुनिंदा मंत्रों का पाठ भी किया जाता है।
यह प्रसिद्ध श्लोक विशेष रूप से बोला जाता है—
सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
सरल पूजा-विधि
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां दुर्गा के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक और धूप जलाएं। रोली, अक्षत, लाल पुष्प और फल अर्पित करें। देवी को गुड़हल का फूल विशेष प्रिय माना जाता है।
अपनी समस्या बताने से पहले देवी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें। मंत्र-जाप और आरती के बाद पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। सामर्थ्य के अनुसार कन्या, जरूरतमंद महिला या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराएं।
कृपा का वास्तविक अर्थ
देवी की कृपा का अर्थ यह नहीं कि जीवन में कोई कठिनाई नहीं आएगी। उनकी आराधना मनुष्य को संकट से लड़ने की शक्ति, सही निर्णय का विवेक और असफलता के बाद फिर खड़े होने का साहस देती है।
मां की वास्तविक पूजा तभी सार्थक है जब भक्त महिलाओं और बेटियों का सम्मान करे, निर्बलों की सहायता करे तथा अन्याय के सामने मौन न रहे। करुणा, साहस और सदाचार को जीवन में उतारना ही महाकृपालु माता की सच्ची आराधना है।

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