मुख्यपृष्ठस्तंभमुंबई मेरी जान! : ...तो तुरंत डायल करें १९३०

मुंबई मेरी जान! : …तो तुरंत डायल करें १९३०

 

उमा सिंह

साइबर प्रâॉड आज की तारीख में सबसे आम अपराध बन गया है…आम आदमी इसके शिकंजे में फंसता जा रहा है… लेकिन क्या हो अगर एक आईटी प्रोफेशनल जो इस मामले का एक्सपर्ट है, वही साइबर प्रâॉड के जाल में फंस जाए। यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन मुंबई के सांताक्रुज में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां वर्षों से लोगों को साइबर खतरों के प्रति आगाह करने वाले एक रिटायर्ड प्रोफेशनल खुद ढाई लाख रुपए की ठगी का शिकार हो गए।
इस धोखाधड़ी की पटकथा तब शुरू हुई जब विक्टिम (आईटी प्रोफेशनल) ने बिजली कनेक्शन में नाम बदलवाने के लिए टाटा पावर में आवेदन किया। अपराधियों की टाइमिंग इतनी सटीक थी कि उन्होंने ठीक उसी समय कॉल किया जब पीड़ित विभाग की ओर से पुष्टिकरण कॉल की उम्मीद कर रहे थे। जालसाजों के पास उनका नया कंज्यूमर नंबर और घर का पता जैसी सटीक जानकारी पहले से मौजूद थी, जिससे एक अनुभवी एक्सपर्ट का भरोसा जीतना उनके लिए आसान हो गया।
उस दिन्ा वो व्यक्तिगत कारणों से काफी तनाव में थे, जिसका फायदा उठाते हुए अपराधियों ने उन्हें ई-केवाईसी के नाम पर एक .Aझ्ख् फाइल इंस्टॉल करने के लिए राजी कर लिया। जैसे ही यह फाइल फोन में आई, हैकर्स को उनके डिवाइस का पूरा एक्सेस मिल गया। हालांकि, विक्टिम के खाते में उस समय मामूली रकम थी, लेकिन अपराधियों ने चालाकी से उनके नाम पर एक इंस्टेंट लोन मंजूर करवा लिया और ढाई लाख रुपए निकाल लिए। पुलिस के अनुसार, इस चोरी की गई रकम का इस्तेमाल बाद में क्रेडिट कार्ड के बिल भरने के लिए किया गया।
साइबर पुलिस ने इस घटना के बाद कड़ा परामर्श जारी किया है। किसी भी परिस्थिति में अनजान नंबरों से आने वाले लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई संदिग्ध फाइल डाउनलोड करें। कोई भी आधिकारिक संस्थान व्हॉट्सऐप कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी या ऐप इंस्टॉल करने की मांग नहीं करता है। यदि आप भी किसी ऐसे जाल में फंसते हैं, तो बिना देर किए १९३० हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें और नजदीकी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराएं। यह घटना हमें सिखाती है कि साइबर सुरक्षा के मामले में सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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