-शामिल हुए कृषि, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल
उमेश गुप्ता / वाराणसी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शनिवार को नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से आयोजित ‘रंगीलो काशी’ कार्यक्रम में पहली बार नंदी कैटवॉक कराया गया। इसमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गिर सहित विभिन्न देशी नस्लों के गोवंश की प्रदर्शनी लगाई गई। साहीवाल सांड के साथ उसकी बछिया, गिर सांड के साथ उसकी बछिया और भदावरी भैंस के साथ उसकी पड़िया को कैटवॉक कराया गया। इसके माध्यम से पशुओं और उनकी संतानों के बीच संबंधों के साथ देशी नस्लों की विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में पशुपालकों को सम्मानित भी किया गया तथा किसानों को पशुपालन के माध्यम से आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में कृषि, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने गोवंश की पूजा-अर्चना की और बछड़े की आरती उतारी। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में देशी नस्लों के संरक्षण और उनमें सुधार के लिए लगातार काम किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन को खेती के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
मंत्री धर्मपाल ने कहा कि पहले कई देशी नस्ल की गायें एक से दो लीटर तक दूध देती थीं, लेकिन कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार की तकनीक के इस्तेमाल से अब इन्हीं नस्लों की दुग्ध क्षमता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि बेहतर नस्ल के माध्यम से कई गायों की दूध उत्पादन क्षमता 10 से 12 लीटर तक पहुंची है।
उन्होंने काशी क्षेत्र की गंगा-गिरि गाय का भी उल्लेख किया। मंत्री के अनुसार इस देशी नस्ल को विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गिर नस्ल के भ्रूण और बेहतर नस्ल तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की ओर से काशी की गिरि गायों की नस्ल को विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
मंत्री ने बताया कि बछिया पैदा कराने के लिए उपयोग किए जाने वाले विशेष वीर्य की कीमत पहले 300 रुपये थी, जिसे अब घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराना और पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘रंगीलो काशी’ कार्यक्रम का उद्देश्य देशी पशु नस्लों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ किसानों और पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन की तकनीकों से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में विभिन्न नस्लों के पशुओं को प्रदर्शित किया गया। पशुपालकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। आयोजन के माध्यम से किसानों को संदेश दिया गया कि बेहतर नस्ल, वैज्ञानिक पशुपालन, कृत्रिम गर्भाधान और दुग्ध उत्पादन में सुधार के जरिए पशुपालन को आय का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में देशी नस्लों के संरक्षण, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। काशी में पहली बार हुए नंदी कैटवॉक ने आयोजन को खास आकर्षण दिया और विभिन्न नस्लों के पशुओं के प्रति लोगों का ध्यान खींचा।
