सामना संवाददाता / मुंबई
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के निजीकरण को लेकर शुरू सुगबुगाहट से विरोधी दल अलर्ट मोड पर आ गए हैं। विरोधी दलों ने देश में सरकारी कंपनियों के निजीकरण को लेकर विरोध जताया है। अब एलआईसी के निजीकरण और आक्रामक रुख अपनाने का पैâसला किया है। एलआईसी के निजीकरण को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने मांग की है कि सरकार एलआईसी जैसी लाभ कमानेवाली सार्वजनिक संस्था का निजीकरण न करे और सरकारी कंपनियों के निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे।
मुंबई में ऑल इंडिया नेशनल लाइफ इंश्योरेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन की कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि एलआईसी ने वर्षों से देशवासियों का भरोसा जीता है और यह सरकार के उन चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में शामिल है, जो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे संस्थान को निजी हाथों में सौंपना उचित नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एलआईसी कर्मचारियों की मांगों को संसद में भी उठाया जाएगा। उन्होंने एलआईसी प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि भाजपा सांसदों से भी मिलकर अपनी बात रखें। उनके अनुसार, यह केवल किसी एक दल का नहीं बल्कि देश के करोड़ों पॉलिसीधारकों और कर्मचारियों से जुड़ा मुद्दा है। सुप्रिया सुले ने यह भी माना कि बदलते समय के साथ एलआईसी को नई तकनीक अपनानी होगी और प्रतिस्पर्धी निजी कंपनियों के मुकाबले अपनी कार्यप्रणाली और गति में सुधार करना होगा, ताकि आनेवाले वर्षों में भी उसकी विश्वसनीयता और बाजार में मजबूती बनी रहे।
एलआईसी के निजीकरण को लेकर एनसीपी का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश और निजीकरण को लेकर देशभर में लगातार राजनीतिक बहस जारी है। विपक्ष इसे सरकारी संपत्तियों के निजी हाथों में जाने का मुद्दा बना रहा है, जबकि केंद्र सरकार विनिवेश को आर्थिक सुधारों का हिस्सा बताती रही है।
