सामना संवाददाता / मुंबई
धारावी पुनर्विकास परियोजना को लेकर एक बार फिर महायुति सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। सरकार ने अब मुंबई के मुलुंड डंपिंग ग्राउंड की १५ एकड़ जमीन भी धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) के नाम पर अडानी की कंपनी के लिए आवंटित कर दी है। इस फैसले के बाद धारावी परियोजना के लिए अब तक करीब ६०० एकड़ जमीन उपलब्ध कराए जाने का दावा किया जा रहा है। यह १५ एकड़ जमीन परियोजना के निर्माण कार्य के लिए कास्टिंग यार्ड के रूप में इस्तेमाल की जाएगी। मुंबई मनपा ने इसे पांच वर्षों की लीज पर डीआरपी को, यानी परियोजना का काम संभाल रही अडानी समूह की नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया है। इसके बदले करीब ९८.४७ करोड़ रुपए का लीज शुल्क तय किया गया है। इससे पहले भी धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए मुंबई के विभिन्न हिस्सों की बड़ी-बड़ी सरकारी और सार्वजनिक जमीनें आवंटित की जा चुकी हैं। इनमें नमक क्षेत्र की लगभग २५६ एकड़, देवनार डंपिंग ग्राउंड की १२४ एकड़, माहिम रेलवे की ४५ एकड़, कुर्ला मदर डेयरी की २१.२५ एकड़, मालाड मढ़ की ३४ एकड़ और धारावी बेस्ट डिपो की ११.५८ एकड़ जमीन शामिल है। अब मुलुंड की १५ एकड़ जमीन भी इस सूची में जुड़ गई है।
सरकार के फैसले से नाराजगी
सरकार के इस फैसले को लेकर स्थानीय नागरिकों और विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि धारावी पुनर्विकास के नाम पर मुंबई की मूल्यवान सार्वजनिक जमीनें लगातार एक निजी डेवलपर को सौंपी जा रही हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
