राजेश सरकार / प्रयागराज
जमीन, रोजगार और अपने वजूद की लड़ाई को लेकर सोमवार को शंकरगढ़ क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय किसान दलित मजदूर विकास मंच के बैनर तले जुटे किसानों ने एक सुर में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और स्थानीय स्तर पर युवाओं की उपेक्षा के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर सीलिंग की जमीन को निजी हाथों में सौंपने की गहन जांच कराने और न्याय दिलाने की तीखी मांग की है।
ढाई सौ बीघा सीलिंग की सरकारी जमीन ‘औने-पौने’ दाम पर निजी कंपनी को बेचने का आरोप
मंच के अध्यक्ष और किसान नेता शमीम अहमद उर्फ समुंदर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि शंकरगढ़ विकासखंड के कपारी, खान सेमरा और मिश्रा का पूरा सहित कई गांवों में कोल, सपेरा, केवट, धईकार, चमार और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग दशकों से मकान बनाकर रह रहे हैं। साल 2022 में राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) ने तत्कालीन जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपी थी कि यहां लगभग 250 बीघा सीलिंग की सरकारी जमीन मौजूद है। किसानों का सीधा आरोप है कि अब इसी बेशकीमती जमीन को एक निजी कंपनी ने सांठ-गांठ कर कथित तौर पर औने-पौने दामों में अपने नाम करा लिया है, जिससे दशकों से रह रहे गरीबों के आशियाने पर खतरा मंडरा रहा है।
‘जमीन हमारी, बिजली घर हमारा, तो रोजगार बाहरी युवाओं को क्यों?’
प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र के बिजली घर में स्थानीय युवाओं को नौकरी न दिए जाने का मुद्दा भी बेहद प्रखरता से उठाया। किसान नेताओं ने कहा कि एक तरफ स्थानीय ग्रामीणों की जमीनें और संसाधन लिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यहां के पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। बाहरी लोगों को तवज्जो दिए जाने से क्षेत्र के युवाओं में भारी आक्रोश है।
इंसाफ की गुहार, जांच न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
जिलाधिकारी कार्यालय के घेराव के दौरान किसानों ने “इंसाफ करो” और “हमारी जमीन वापस करो” के गगनभेदी नारे लगाए। किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस पूरे जमीन सौदे की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कर भू-माफियाओं और कंपनी पर कार्रवाई नहीं हुई, और स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला, तो वे आने वाले दिनों में चक्का जाम और उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
