जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारी ने जनता की सुरक्षा से पल्ला झाड़ा
मयंक हत्याकांड के बाद सहमे यात्री
जेदवी / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन कही जानेवाली लोकल ट्रेनें अब यात्रियों के लिए भय का दूसरा नाम बनती जा रही हैं। लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की पूरी पोल खोल दी है। बोरीवली में २२ वर्षीय युवक मयंक लोहार की चाकू मारकर हत्या के बाद रेलवे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि बोरीवली जीआरपी के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दत्ता एम. खुर्पेकर ने स्वयं यह स्वीकार किया कि पुलिस अपराध नहीं रोक सकती।
घटना के दो दिन बाद भी यात्रियों में खौफ का माहौल है। चर्चगेट से लेकर बोरीवली तक लोकल में सफर करनेवाले लोग सहमे हुए नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अब ट्रेन में यात्रा करते समय उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। रेलवे पुलिस के इस बयान ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी ही यह मान ले कि अपराध रोकना उसके बस की बात नहीं है, तो फिर लाखों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल में दरवाजा खोलने-बंद करने के विवाद में २२ वर्षीय मयंक लोहार की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
रोशन सुवर्णा को ७ दिनों की पुलिस हिरासत
आरोपी रोशन सुवर्णा वारदात के बाद चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था और मंगलुरु भागने की तैयारी में था। जीआरपी ने ४०० से अधिक सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी के आधार पर उसे २४ घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
फिर भी नहीं जागा सिस्टम
मुंबई लोकल में यह कोई पहली घटना नहीं है। जनवरी २०२६ में मालाड स्टेशन पर एक कॉलेज प्रोफेसर पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया था। महज पांच-छह महीनों के भीतर यह दूसरी बड़ी चाकूबाजी की घटना है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं देता।
मेटल डिटेक्टर और स्कैनर केवल दिखावा?
यात्री संगठनों और मुंबई रेल प्रवासी संघ ने स्टेशनों पर लगे मेटल डिटेक्टर और लगेज स्वैâनरों की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मेट्रो और हवाई अड्डों की तरह सख्त जांच व्यवस्था नहीं होने से लोग आसानी से चाकू और अन्य धारदार हथियार लेकर लोकल ट्रेनों में प्रवेश कर रहे हैं। यात्रियों ने मांग की है कि स्टेशनों पर हाईटेक स्कैनिंग मशीनें लगाई जाएं, सुरक्षा जांच बढ़ाई जाए और नशे में यात्रा करनेवालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
