मुख्यपृष्ठसमाचारप्रयागराज का विद्युत विभाग कुंभकर्णी नींद से जागने को तैयार नहीं!

प्रयागराज का विद्युत विभाग कुंभकर्णी नींद से जागने को तैयार नहीं!

-डीएम की दो टूक-हादसा हुआ तो सीधे जेल जाओगे

राजेश सरकार / प्रयागराज

नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन कितना भी गंभीर हो, लेकिन प्रयागराज का विद्युत विभाग कुंभकर्णी नींद से जागने को तैयार नहीं है। स्कूलों के ऊपर मौत बनकर मंडरा रहे हाईटेंशन तारों को हटाने के लिए सरकारी खजाने से बजट भी जारी हो चुका है, लेकिन विभाग के ढीले रवैये के कारण काम आज भी फाइलों में ही रेंग रहा है। विभाग की इस लापरवाही पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा का गुस्सा फूट पड़ा है।
पैसा मिला, फिर भी काम में ‘शर्मनाक’ ढिलाई
शुक्रवार को संगम सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जब बिजली विभाग की स्थिति सामने आई तो हर कोई दंग रह गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बैठक में स्पष्ट किया कि शासन की ओर से बजट उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके बावजूद बिजली विभाग के अभियंता अब तक कई विद्यालयों के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तारों को नहीं हटा सके हैं। सवाल यह उठता है कि जब काम के लिए पैसा मिल चुका है तो फिर बिजली विभाग किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
हिदायत: हादसा हुआ तो दर्ज होगी एफआईआर
बीएसए के इस खुलासे पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने विद्युत विभाग के अभियंताओं को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि तत्काल अभियान चलाकर स्कूलों के ऊपर से गुजर रहे जानलेवा तारों को हटाना सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने कड़े लहजे में बिजली विभाग के लापरवाह अभियंताओं को चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्कूल में इन तारों की वजह से कोई अप्रिय घटना या हादसा होता है तो संबंधित अभियंता के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
तालमेल की कमी या काम से जी चुराने की आदत?
डीएम ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भी निर्देश दिया कि वे विद्युत विभाग के संबंधित अभियंताओं के साथ लगातार समन्वय बनाए रखें और हर हाल में तारों को हटवाने की कार्रवाई पूरी कराएं। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह और अपर जिलाधिकारियों समेत सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब देखना यह है कि जिलाधिकारी की इस तीखी फटकार और ‘जेल भेजने’ की चेतावनी के बाद बिजली विभाग के अभियंता अपनी सुस्ती छोड़कर जमीन पर उतरते हैं या फिर मासूम बच्चों की जिंदगी यूं ही ‘हाई वोल्टेज’ खतरे के साए में कटती रहेगी।

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