हजारों शिक्षक सड़कों पर उतरने को तैयार
समूह मान्यता रद्द करो, गैर शैक्षिक बोझ हटाओ, रिक्त पदों को भरने की मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
‘टीईटी’ की तलवार और ठेकेदारी की जंजीर से जकड़े शिक्षकों का सब्र आखिर टूट ही गया है। इन्हीं दमनकारी नीतियों के विरोध में अब आंदोलन की आंधी उठ खड़ी हुई है और आज पूरे महाराष्ट्र में स्कूल बंद रखे गए हैं। हजारों शिक्षक सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हैं।
समूह मान्यता रद्द करो, गैर-शैक्षिक बोझ हटाओ और रिक्त पदों को तुरंत भरो जैसी मुख्य मांगों को लेकर राज्य भर के शिक्षक संगठनों ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्णय नहीं बदला गया तो संघर्ष और उग्र होगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षकों पर गैर शैक्षणिक कामों का बोझ लगातार बढ़ा है। इसके अलावा टीईटी की अनिवार्यता के कारण कई शिक्षकों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, ५३ वर्ष से कम आयु के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी देना अनिवार्य किया गया है, जिससे वर्षों से अध्यापन कर रहे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। इसी तरह समूह मान्यता के चलते राज्य के हजारों शिक्षकों के अतिरिक्त घोषित होने का खतरा भी पैदा हुआ है। संगठनों का कहना है कि इन मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह ‘स्कूल बंद’ आंदोलन किया जा रहा है। इस आंदोलन को महाराष्ट्र राज्य शिक्षक सेना, शिक्षण संस्था महामंडल, शिक्षक भारती, मुंबई मराठी अध्यापक संघ समेत कई संगठनों ने समर्थन दिया है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
२०१३ के पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता रद्द की जाए। समूह मान्यता का जीआर रद्द कर पुराने मानदंड लागू किए जाए। ऑनलाइन व अशैक्षणिक कार्यों का बोझ शिक्षकों पर डालना बंद हो। शिक्षण सेवक योजना रद्द कर नियमित वेतन श्रेणी दी जाए। शिक्षकेतर कर्मचारियों के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए। संशोधित आश्वासित प्रगति योजना लागू की जाए।
