-अमित शाह से शिकायत न आई काम
-शिंदे गुट को प्रदेश अध्यक्ष का झटका
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर दिल्ली का दखल बेअसर साबित हुआ है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सामने दो और पदाधिकारी पार्टी में शामिल हो गए हैं, जिसे शिंदे गुट के लिए एक तगड़ा झटका माना जा रहा है। भाजपा की इस तोड़फोड़ की वजह से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिंदे गुट की बेचैनी बढ़ गई है। इस घटनाक्रम से नाराज होकर शिंदे गुट के एक मंत्री ने बोला कि वे विरोध स्वरूप वैâबिनेट का बहिष्कार करेंगे, जिससे महायुति में तनाव की स्थिति बन गई है।
बता दें कि मनपा चुनावों के ठीक मुहाने पर ठाणे इलाके में भाजपा और शिंदे गुट में एक-दूसरे के कार्यकर्ता-पदाधिकारियों को खींचने की होड़ लग गई है। शिंदे ने दिल्ली जाकर इसकी शिकायत की थी। मगर हकीकत में इसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा। इससे भाजपा-शिंदे गुट के स्थानीय नेताओं में तनाव है। महायुति के घटक दलों के एक-दूसरे के पदाधिकारी-कार्यकर्ताओं की फूट रोकने का संदेश दिल्ली से आने के बावजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इस संदेश को ठुकरा दिया है। रवींद्र चव्हाण ने एक बार फिर शिंदे गुट को झटका देते हुए डोंबिवली के दो नेताओं, कल्याण ग्रामीण उप तालुका प्रमुख विकास देसले और नेता सदानंद थरवल के बेटे अभिजीत थरवल को तोड़ कर भाजपा में शामिल कर लिया है। इससे महायुति में फिर से खटास पैदा हो गई है। जानकारी सामने आ रही है कि इस पार्टी प्रवेश से बेचैन हुए शिंदे गुट के मंत्रियों ने सीधे मंत्रिमंडल की बैठक के बहिष्कार का निर्णय लिया है।
थम नहीं रहा पलायन
नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों की प्रक्रिया शुरू होते ही महायुति में एक-दूसरे के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का पलायन होने लगा है। यह सिलसिला अभी थमा नहीं है। खासकर एकनाथ शिंदे का गढ़ माने जाने वाले ठाणे जिले में उनके कई पदाधिकारियों ने जय महाराष्ट्र कहकर भाजपा में प्रवेश किया है। इससे स्थानीय निकायों के चुनावों में यहां के राजनीतिक समीकरण बदलने वाले हैं।
