– बंगले की लॉबी में घंटों बिठाए रखा
– काम नहीं आया पिता रामदास कदम का ‘शील्ड’
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री ही जब गुंडों को सरकारी सुरक्षा कवच देने लगें तो यह समझा जा सकता है कि सिस्टम कहां जा रहा है। यह गंभीर मुद्दा आज महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में है। गृह राज्यमंत्री योगेश कदम द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमिवाले सचिन घायवल को शस्त्र लाइसेंस जारी करने के पैâसले ने न केवल विपक्ष, बल्कि उनके अपने ही बॉस एकनाथ शिंदे को नाराज कर दिया है। आलम यह है कि मंत्री को बॉस से मिलने के लिए बंगले की लॉबी में घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन वे योगेश कदम से नहीं मिले। इतना ही नहीं, उनके पिता रामदास कदम का ‘शील्ड’ भी इस आग को बुझाने में नाकाम रहा।
उल्लेखनीय है कि योगेश कदम द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सचिन घायवल को शस्त्र लाइसेंस मंजूर करने के मामले में फंसे शिंदे गुट के नेता और गृह राज्यमंत्री योगेश कदम का राजनीतिक ग्रह चक्र फिलहाल प्रतिकूल चल रहा है। पिछले दो दिनों से महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने आरोपों की बौछार करते हुए और इस्तीफे की मांग करते हुए योगेश कदम को घेर रखा है। इससे योगेश कदम के सामने अब तक की सबसे बड़ी दिक्कत आकर खड़ी हो गई है। ऐसे में उनके पिता और शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता रामदास कदम का बचाव भी अपर्याप्त साबित हो रहा है, जिससे योगेश कदम बड़े संकट में फंस गए हैं। इसी बीच अब खबर सामने आई है कि योगेश कदम से खुद एकनाथ शिंदे भी बेहद नाराज हैं। इस नाराजगी के चलते योगेश कदम को शुक्रवार को घंटों तक एकनाथ शिंदे के बंगले पर इंतजार करना पड़ा।
मुक्तागिरी बंगले पर गए थे मिलने
सूत्रों के अनुसार, गृह राज्यमंत्री योगेश कदम कल सुबह उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिलने दक्षिण मुंबई स्थित मुक्तागिरी बंगले पर गए थे। हालांकि, वे घंटों वहां इंतजार करते बैठे रहे। लेकिन एकनाथ शिंदे उनसे मिलने आए ही नहीं। योगेश कदम से एकनाथ शिंदे के न मिलने की वजह से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
गुट की छवि हुई धूमिल
शिंदे गुट के भीतर अब यह बात उभरने लगी है कि योगेश कदम और रामदास कदम की वजह से गुट की छवि धूमिल हो रही है। सचिन घायवल को शस्त्र लाइसेंस मंजूर करके योगेश कदम ने विरोधियों के हाथ में सीधे हथियार दे दिए हैं। कुख्यात गुंडे से संबंध होने के आरोप पर हो रही आलोचना का जवाब देना शिंदे गुट के लिए मुश्किल हो गया है। इस सबका असर गुट की छवि पर पड़ रहा है। इसलिए अब सबकी नजरें एकनाथ शिंदे पर टिकी हैं कि आखिरकार वे कदम पर किस तरह का पैâसला लेते हैं।
