तकनीकी समस्या बनी बड़ी वजह
सामना संवाददाता। मुंबई
महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के तहत लिस्टेड बड़ी संख्या में निजी अस्पताल वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार १८२ करोड़ रुपए से ज्यादा के बकाया बिलों का भुगतान करने में विफल रही है। कई अस्पतालों का दावा है कि पिछले साल से भुगतान अटका हुआ है जिसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। निजी अस्पतालों में छोटे अस्पताल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना में भाग लेने वाले १,७९२ अस्पतालों में से १,१४४ निजी हैं। इस लंबित मामले का सबसे ज्यादा असर छोटे- छोटे अस्पतालों में देखा गया, जहां पर मरीजों की संख्या ज्यादा है।
कई अस्पताल अब प्रतिपूर्ति की अनिश्चितता के कारण इस योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती करने से हिचकिचा रहे हैं। कुछ मामलों में तो, जरूरी सर्जरी कथित तौर पर स्थगित कर दी गई है क्योंकि आपूर्तिकर्ताओं ने बकाया भुगतान न होने के कारण मेडिकल इम्प्लांट और उपभोग्य वस्तुएं उपलब्ध कराना बंद कर दिया है। नए भुगतान मॉडल में परिवर्तन के कारण देरी होने की बात कही गई है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने अब तक लगभग १,५५० करोड़ रुपये वितरित कर दिए हैं। हालाँकि, सितंबर के अंतिम सप्ताह तक लगभग १८२ करोड़ रुपये बकाया रह गए थे।
स्वास्थ्य मंत्री ने तकनीकी समस्याओं को स्वीकार किया
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्वीकार किया कि कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण देरी हुई। आबिटकर ने कहा, ‘वित्त विभाग ने पहले ही भुगतान को मंज़ूरी दे दी है और साल के अंत से पहले धीरे-धीरे भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अभी तक केवल १८२ करोड़ रुपये ही बकाया हैं। भुगतान में इस तरह की देरी, निम्न आय वाले परिवारों को मु़फ्त, वैâशलेस इलाज उपलब्ध कराने के स्वास्थ्य बीमा योजना के मूल उद्देश्य को ही कमजोर कर देती है। जब तक सरकार बिलों के निपटान में तेजी नहीं लाती और समय पर प्रतिपूर्ति सुनिश्चित नहीं करती, राज्य की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना की विश्वसनीयता खतरे में पड़ सकती है।
