कविता श्रीवास्तव
बारिश थमी तो मुंबई की आबोहवा फिर बिगड़ने लगी है। मौसम परिवर्तन पर यह स्वाभाविक है। क्योंकि अब ठंड का मौसम शुरू हो रहा है, इसलिए वायु की गुणवत्ता ज्यादा बिगड़ सकती है। गर्मी के मुकाबले शीतकाल में हवा का प्रवाह कुछ थमा सा रहता है। साथ ही निर्माण आदि के कार्य भी जोर पकड़ते हैं। उनसे उड़नेवाले धूल-मिट्टी के कण हवा में ही विद्यमान रहते हैं। वाहनों के धुएं भी उसी में पैâलते हैं। इसी कारण शीतकाल में वायु की गुणवत्ता का सूचकांक (एक्यूआई) बढ़ता है। इसलिए इस मौसम में ज्यादा सावधानी की आवश्यकता है। ठंडी में हवा अत्यधिक प्रदूषित रहती है इसीलिए नाक, गले, छाती में इन्फेक्शन, सर्दी-जुकाम व अन्य तकलीफें बढ़ने लगती हैं। फिलहाल, मुंबई के कई इलाकों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स १०० के पार दर्ज हुआ है। इसके कम होने की नहीं, बल्कि बढ़ने की ही संभावना है। बारिश के दौरान वायु गुणवत्ता ५० एक्यूआई से भी कम थी। अब दीपावली का पर्व भी शुरू होने को है। मुंबई में पटाखे आने भी लगे हैं। दीपावली में तमाम प्रतिबंधों और धरपकड़ के बाद भी मुंबई में सड़कों पर पटाखे आसानी से मिल जाते हैं। दीपावली का पर्व है तो बड़ी मात्रा में पटाखे फूटना भी तय है क्योंकि त्योहार मनाने से किसी को रोका नहीं जा सकता है। पटाखों से वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण दोनों परेशानी का सबब बनते हैं। पटाखे को लेकर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट भी सकारात्मक रुख अपना रहा है। दिल्ली-एनसीआर इलाकों में पटाखों पर प्रतिबंध लगा है। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ ग्रीन पटाखे जलाने की इजाजत देने का संकेत दिया है। खुद चीफ जस्टिस का कहना है कि पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक न तो व्यावहारिक है और न ही आदर्श। ऐसे प्रतिबंधों का ज्यादातर उल्लंघन ही होता है इसलिए ऐसे मामलों में बैलेंस बनाना जरूरी है। उधर, सॉलिसिटर जनरल ने भी अपील की है कि बच्चों को दो दिन तो त्योहार मनाने दीजिए। वैसे पटाखों से निकलने वाला बारूद पर्यावरण की दृष्टि से नुकसानदेह ही है। यही वजह है कि तमाम राज्यों में पटाखों पर बैन लगाया गया है या फिर कम पटाखे जलाने की अपील की गई है। विकल्प के रूप में ‘ग्रीन व्रैâकर’ भी मार्वेâट में खूब आए हैं। इसीलिए तमाम रोक के बावजूद दीपावाली की रात जमकर आतिशबाजी होना तय है। यह वर्षों से हो रहा है। यह त्योहार का उमंग है। लोगों का उत्साह है। सालभर के इंतजार का पर्व है इसलिए शासन-प्रशासन सबको त्योहार मनाने देता है। ऐसे में हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि हम त्योहार भी मनाएं और दूसरों को तकलीफ न हो इसका भी ध्यान रखें। साथ ही पर्यावरण और प्रदूषण के प्रति सचेत रहें। ठंडी के इस मौसम का स्वागत करें, मेहमानों का स्वागत करें और गाएं…
ठंडी हवाएं, लहरा के आएं
रुत है जवां, तुमको यहां कैसे बुलाएं…!
