मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति में ऑल इज नॉट वेल ... भाजपा व शिंदे गुट में...

महायुति में ऑल इज नॉट वेल … भाजपा व शिंदे गुट में पहले मंदिर पर बवाल अब लैंड वॉर! … मीरा-भायंदर मनपा चुनाव से पहले गरमाई सियासत

सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर में होनेवाले महानगरपालिका चुनाव से पहले शहर का सियासी तापमान बढ़ गया है। भाजपा और शिंदे गुट के बीच अब सीधे टकराव की नौबत आती दिख रही है। कुछ दिनों पहले शिंदे गुट के विधायक और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता पर अप्रत्यक्ष रूप से आरोप लगाया था कि वे अपने भाई विनोद मेहता के साथ मिलकर एक पुरानी और धोखादायक इमारत पुनर्विकास के नाम पर भायंदर (पूर्व) में बीपी रोड स्थित श्री शिवशक्ति मंशापूर्ण हनुमान शनि मंदिर को तोड़ने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद शिंदे गुट के लोगों ने अपना विरोध प्रकट करते हुए मंदिर में महाआरती का आयोजन किया।
उधर, आरोपों को बेबुनियाद और उन्हें बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश बताते हुए मेहता ने दावा किया कि उनका तथा उनके भाई का पुनर्विकास योजना से कोई लेना-देना नहीं है। शिंदे गुट के नेताओं को ही बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बताते हुए मेहता ने कहा कि संबंधित सोसाइटी के पदाधिकारियों तथा मंदिर के मालिक को भी पुनर्विकास योजना के बारे में कल्पना तक नहीं है और ये लोग मंदिर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। यह मामला अभी चल ही रहा था कि भाजपा के एक प्रमुख पदाधिकारी ने शहर के नामी वकील तरुण शर्मा के कार्यालय में प्रेस कॉन्प्रâेंस का आयोजन किया, जिसमें मौजूद विवेकानंद झा नामक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि स्थानीय बिल्डर शंकर झा ने आदिवासी समुदाय की जमीन हड़पने के उद्देश्य से मात्र ५० हजार रुपए देकर ४०० करोड़ की कंस्ट्रक्शन कंपनी में गैरकानूनी तरीके से ५० प्रतिशत भागीदारी हासिल कर ली। ज्ञात हो कि शंकर झा हाल ही में शिंदे गुट में शामिल हुए हैं। अपने ऊपर आरोपों को खारिज करते हुए शंकर झा ने विवेकानंद को यह कहकर कटघरे में खड़ा कर दिया कि जो खुद ही दिवालिया घोषित हो चुका है और जिसके खिलाफ पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हों वो सिर्फ झूठे और बेसिर पैर की कहानियां बुनकर अपने राजनैतिक आकाओं को खुश करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता।

संघर्ष और तेज होने की संभावना
शंकर झा ने कहा कि हम कानून के दायरे में रहकर ही अपना व्यापार करते हैं और वक्त आने पर परदे के पीछे छिपे नेता को बेनकाब करेंगे।
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जानेवाले भाजपा के एक ताकतवर नेता द्वारा उनके व्यवसाय में रोड़ा डालने और ज्याादतियों से तंग आकर शंकर झा ने शिंदे गुट का दामन थाम लिया।
शिंदे गुट और भाजपा के नेताओं के बीच चल रहे वाद-विवाद से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्षों के बीच मनपा चुनावों के पहले संघर्ष और तेज होगा।

अन्य समाचार