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गोवंडी में १८५ लाख मीट्रिक टन कचरे का पहाड़! … देवनार के आस-पास रहनेवालों का जीना दुश्वार!

डंपिंग ग्राउंड बंद करने को लेकर लोग हुए आक्रामक

सामना संवाददाता / मुंबई
तलोजा और अंबरनाथ में डंपिंग की समस्या जारी रहने के साथ-साथ मुंबईवासियों के कचरे का भार उठाने वाले देवनार लैंडफिल की क्षमता भी समाप्त हो गई है। एक हालिया सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इस डंपिंग ग्राउंड पर १८५ लाख मीट्रिक टन कचरा जमा हो गया है। इसकी ऊंचाई ८ से ४० मीटर तक पहुंच गई है। मुंबई का कचरा १९२७ से देवनार डंपिंग ग्राउंड पर डाला जा रहा है। १२० हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस डंपिंग ग्राउंड में हर दिन ५,९०० मीट्रिक टन कचरा आता है और अब तक १८.५ मिलियन मीट्रिक टन ठोस कचरा जमा हो चुका है। स्थानीय नागरिक अब डंपिंग ग्राउंड को बंद करने के लिए आक्रामक हो गए हैं।
कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड की तर्ज पर यहां भी बायोरिएक्टर और कंपोस्ट तकनीक का उपयोग करके वैज्ञानिक तरीके से कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा। देवनार डंपिंग ग्राउंड में रोजाना निकलनेवाले कचरे के लिए जरूरी ५० एकड़ अस्थाई जमीन, बिजली उत्पादन परियोजना के चालू होने तक मुंबई मनपा के पास सुरक्षित रखी गई है। इस बीच अंबरनाथ की जमीन मनपा को दे दी गई है। हालांकि, वहां कचरा निपटान को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। तलोजा की जमीन का मामला भी स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अटका हुआ है इसलिए नगर निगम के सामने यह सवाल है कि मुंबई का कचरा कहां डाला जाए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देवनार डंपिंग ग्राउंड में जमा १८५ लाख टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करने के बाद लगभग ११० हेक्टेयर जमीन खाली हो जाएगी। इस प्रकार, यह पूरी जमीन मनपा के नियंत्रण में आ जाएगी।

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