मुख्यपृष्ठग्लैमरकांतारा-1,कदम्ब साम्राज्य को चुनौती देती प्लास्टिक की केन

कांतारा-1,कदम्ब साम्राज्य को चुनौती देती प्लास्टिक की केन

हिमांशु राज

“कांतारा चैप्टर 1” के पावन, सांस्कृतिक और चौथी शताब्दी ईस्वी के गौरवशाली कदंब साम्राज्य में प्लास्टिक की पानी की बोतल क्या कर रही थी—यह सवाल इस वक्त X (पूर्व ट्विटर) से लेकर चाय की दुकानों की टेबल तक गूंज रहा है। फिल्म में ब्रह्मकलश गाने का दृश्य है—पत्तों पर सादा भोजन परोसा जा रहा है, लोग पूरी तल्लीनता से बैठे हैं, और उनके पीछे एक चमचमाती, आधुनिकता की गवाही देती प्लास्टिक बोतल। दृश्य देखने वाले दर्शकों की आंखें तुरंत ‘टाइम मशीन’ मोड में चली गईं—इतिहास और आधुनिक रसायनशास्त्र का संगम।लोगों ने इसे “गेम ऑफ थ्रोन्स” वाले ‘स्टारबक्स कप’ ब्लंडर से जोड़ दिया। फर्क बस इतना है कि वहां कप टेबल पर था, यहां बोतल साम्राज्य के पीछे खड़ी है, मानो कह रही हो—“मैं हर युग में बिकने को तैयार हूँ। ”प्लास्टिक बोतल ने इतिहास की पटकथा में प्रवेश कर मानो यह संदेश दिया कि सस्टेनेबिलिटी और ऐतिहासिक सटीकता दोनों से उसका कोई लेना-देना नहीं। चौथी शताब्दी और 21वीं सदी के इस मेल से दर्शक भ्रमित हैं। क्या कदंब साम्राज्य में पहले से ‘पीने का वॉटर सप्लाई चेन’ सेटअप था? या कोई वक्त-यात्री सेट पर पहुंच गया और प्यास से मजबूर होकर बोतल छोड़ गया?इस “बोतल-कांड” ने यह साबित कर दिया कि फिल्मों में गलती छुपाना मुश्किल है। क्योंकि दर्शक अब सिर्फ कहानी नहीं देखते, बल्कि इतिहास में प्लास्टिक की घुसपैठ भी पकड़ लेते हैं।

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