सामना संवाददाता / पटना
बिहार के सत्ताधारी गठबंधन एनडीए में सबकुछ गड़बड़ चल रहा है। विधानसभा चुनावों में सीटों पर मची खींचतान और सियासी लड़ाई का असर पटना से लेकर दिल्ली तक देखने को मिल रहा है। पहले तो सीट शेयरिंग पर कई दिनों से एनडीए में खटपट देखी गई। और अब तो एनडीए की `मित्र’ पार्टियों के बीच `फ्रेंडली फाइट’ देखने को मिल रही है। जहां एक ओर मंगलवार को जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान के उम्मीदवारों के खिलाफ अपना कैंडिडेट उतारने की धमकी दी तो वहीं दूसरी ओर बुधवार को चिराग की ५ सीटों पर उम्मीदवार उतारकर सीएम नीतीश कुमार ने चिराग को `पांच’ का पंच दे मारा है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि एनडीए में अब सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की सीट बंटवारे के बाद उम्मीदवारों के नाम का एलान शुरू हो गया है। जेडीयू, बीजेपी के बराबर १०१ सीटों पर चुनाव लड़ने को राजी हो गई है, लेकिन अपनी मजबूत सीटें किसी भी सूरत में छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। नीतीश कुमार ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर एनडीए के सीट शेयरिंग के समझौते का फॉर्मूला बिगाड़ दिया है। जेडीयू और बीजेपी बराबर-बराबर १०१-१०१ सीटों पर चुनाव लड़ने का फॉर्मूला तय हुआ था। इसके अलावा बाकी ४१ सीटें सहयोगी दलों में बांट दी गई थीं, जिसमें चिराग पासवान की एलजेपी (आर) को २९ सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम और जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को छह-छह सीटें मिली हैं। जदयू ने बुधवार को जिन ५७ सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान किया है, उसमें पांच सीटें ऐसी हैं, जिनके बारे में माना जा रहा था कि ये चिराग पासवान के कोटे में रहेंगी। एलजेपी को कुल २९ सीटें मिली हैं। इसमें मोरवा, गायघाट, राजगीर, सोनबरसा और एकमा भी थी, जिस पर जेडीयू ने अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। राजगीर सीट पर मौजूदा विधायक कौशल किशोर और सोनबरसा के विधायक व मंत्री रत्नेश सदा को जेडीयू ने प्रत्याशी बनाया है।
‘पलटूराम’ कहीं फिर से पलट न जाए?
चिराग पासवान ने जिन २९ सीटों पर चुनाव लड़ने का अभी तक प्लान बनाया है, उनमें से कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर जेडीयू और भाजपा का कब्जा है। बीजेपी भले ही अपनी जीती सीटें छोड़ रही हो, लेकिन जदयू अपनी जीती हुई सीटें एलजेपी के लिए छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में अब यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर नीतीश कुमार एनडीए के फॉर्मूले को बिगाड़ क्यों रहे हैं। कहीं हर बार की तरह इस बार भी नीतीश कुमार पलटी तो नहीं मारें ना…!
