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रूप निखारे उबटन

शीतल अवस्थी

नरक चतुर्दशी यानी रूप चतुर्दशी के दिन शरीर पर उबटन लगाने की परंपरा है। माना जाता है कि आज उबटन लगाकर सूर्योदय पूर्व स्नान करने से सारे पाप दूर हो जाते हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों में उबटनों का विशेष महत्व माना गया है। आज भी तरह-तरह की घरेलू चीजों को तयशुदा मात्रा में मिलाकर बनाए गए पारंपरिक लेप को जिसे उबटन कहते हैं, लगाया जाता है।
उबटन में इस्तेमाल होने वाली चीजें ठंडे या गर्म रूप में इस्तेमाल न करें। पहली बार किसी उबटन के इस्तेमाल से पहले उसे कान के पीछे वाली त्वचा पर लगाएं। कोई समस्या न होने पर ही चेहरे या हाथ-पैरों में इस्तेमाल करें। उबटन को कभी भी पूरी तरह न सूखने दें। हल्का गीला होने पर ही छुड़ा दें। तैलीय त्वचा के लिए १ चम्मच दही, १ चम्मच बेसन, चुटकी भर हल्दी व २-४ बूंद नींबू के रस को मिलाकर गाढ़ा लेप तैयार करें। त्वचा निरोगी बनेगी और रौनक बढ़ेगी। १०० ग्राम हल्दी की गांठ को रातभर के लिए छाछ में भिगो दें। सुबह पीसकर पेस्ट बनाएं। यह उबटन ठंड से राहत दिलाने और रंगत निखारने में कारगर है। थोड़े-से दही में ८ से १० तुलसी या नीम की पत्तियों का पाउडर मिलाएं। इसके प्रयोग से त्वचा में अक्सर उभरने वाले कील, मुंहासों और दानों से राहत मिलेगी। चम्मच आटे का चोकर, चावल का पेस्ट, ५-६ पुदीने की पत्तियां और ५ गुलाब की पंखुड़ियां एकसार करें। इससे त्वचा मुलायम और सेहतमंद बनेगी। रूखी त्वचा के लिए तिल को दूध में रातभर भिगोकर रखें। सुबह पीसें और चुटकी भर हल्दी मिला लें। यह उबटन त्वचा को निखारने के साथ-साथ ठंड से राहत भी देगा। रात के समय २ बादाम और १ छोटा चम्मच चिरौंजी जरा-से दूध में भिगो दें। सुबह पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। चम्मच चावल का आटा, १ छोटा चम्मच शहद व १ छोटा चम्मच गुलाबजल मिलाकर बना लेप लगाएं। इससे त्वचा खिलेगी व मुलायम भी बनेगी। चम्मच उड़द दाल को कच्चे दूध में भिगो दें। इसका पेस्ट बनाएं। थोड़ा-सा गुलाबजल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। १ चम्मच दही और १ चम्मच आटे में गुलाबजल मिलाकर लेप बनाएं। इसके इस्तेमाल से शरीर की मृत त्वचा से छुटकारा मिलेगा और रंगत निखरेगी। केले के गूदे में १ चम्मच आटा या बेसन डालकर मिलाएं। यह उबटन टैनिंग दूर करने में कारगर भूमिका निभाता है।
राशि के अनुसार स्नान के लिए हमारे धर्म ग्रंथों में यह माना गया है कि इस चर्तुदशी पर यदि विशेष प्रकार की औषधियों से स्नान किया जाए तो वर्षभर शरीर निरोगी तो रहता ही है और घर की सुख समृद्धि में भी वृद्धि होती है। नरक चतुर्दशी के दिन अलग-अलग राशि वालों के लिए अलग-अलग औषधिय स्नान करना फायदेमंद साबित हो सकता है। मेष- मंगल देव की इस राशि के लोगों को पानी में बिल्वपत्र के वृक्ष की छाल और लाल चंदन का चूर्ण डाल कर स्नान करना चाहिए। वृष- वृष राशि वाले व्यक्तियों को इलायची पाउडर और मैनसिल की थोड़ी-सी मात्रा पानी में डाल कर स्नान करना चाहिए। मिथुन- मिथुन राशि के जातक बुध देव को प्रसन्न करने के लिए गाय का गोबर जल से स्पर्श कर के स्नान करें। कर्क- कर्क राशि वालों को अपने स्नान के जल में सफेद चंदन की थोड़ी-सी मात्रा मिला कर स्नान करना चाहिए। सिंह- आपको स्नान के जल में लाल पुष्प और केसर डालकर स्नान करना चाहिए। कन्या- मोती और सोने के आभूषण को कुछ देर जल में रखें। फिर उस जल से स्नान करें। इससे आपके राशि स्वामी बुध देव प्रसन्न होंगे। तुला- ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति के लिए आपको केसर व सुगंधित पौधे के पुष्प को जल में डाल कर स्नान करना चाहिए। वृश्चिक- मंगल देव की प्रसन्नता के लिए आपको लाल पुष्प के जल से स्नान करना चाहिए। धनु- आपके राशि स्वामी बृहस्पति देव को मालती के फूल विशेष प्रिय है। इसलिए आप जल में मालती के फूल डाल कर स्नान करें। मकर- निरोगी रहने के लिए आपको स्नान के जल में काले तिल के पाउडर का उपयोग करना चाहिए। कुंभ- पानी में काले तिल डालकर स्नान करना कुंभ राशि वालों के लिए भी लाभप्रद है। मीन- सुख, समृद्धि औरं ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए जल में मालती के पत्ते या पीली सरसों डाल कर स्नान करें।

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