-प्रो. दयानंद तिवारी ने 30 दिनों में सुधारों की मांग उठाई
सामना संवाददाता / मुंबई
समृद्धि महामार्ग पर रविवार, 14 अक्टूबर 2025 की सुबह एक सड़क हादसे के बाद मदद-तंत्र की गंभीर कमजोरियां सामने आईं। प्रो. दयानंद तिवारी की मारुति ब्रेजा (MH 03 ER 6661) एक स्कॉर्पियो के अचानक ब्रेक लगाने से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गई। घटनास्थल नेटवर्क-ब्लैकस्पॉट में होने के कारण तत्काल मदद नहीं मिल सकी। हादसे के तुरंत बाद एक कार से उतरे 4–5 संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधि से डकैती की आशंका भी बनी रही। हालांकि, किसी तरह की लूटपाट नहीं हो सकी और सभी यात्री सुरक्षित रहे।
कैसे हुआ हादसा
तिवारी के अनुसार, स्कॉर्पियो वाहन करीब 50 किमी तक आगे-पीछे गति बदलते हुए चल रहा था। जैसे ही हाईवे का सुनसान और बिना नेटवर्क वाला हिस्सा आया, स्कॉर्पियो ने अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाया, जिससे पीछे आ रही ब्रेज़ा उससे टकरा गई। तिवारी का आरोप है कि स्कॉर्पियो चालक मौके से भाग गया। कुछ ही पलों में बाईं ओर से एक अन्य कार रुकी और चार-पांच युवक पास आकर खड़े हो गए। परिवार की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें लूट की साजिश का संदेह हुआ। “हम सब सुरक्षित थे, शायद इसी वजह से वे बिना कुछ किए थोड़ी देर में लौट गए,” तिवारी ने बताया।
नेटवर्क नहीं, मदद नहीं
हादसे के बाद चार अलग-अलग मोबाइल होने के बावजूद किसी में सिग्नल नहीं मिला। “कॉल नहीं लग रही थी, हम पूरी तरह बेबस थे,” तिवारी ने कहा। ड्राइवर ने बताया कि कूलेंट पूरा गिर चुका था, फिर भी जोखिम लेकर गाड़ी को थोड़ा आगे बढ़ाया गया। लगभग एक किलोमीटर आगे कमज़ोर नेटवर्क मिला तो वाशिम स्थित मारुति शोरूम से संपर्क हो सका। शोरूम कर्मियों ने भी ऐसे मामलों के बढ़ने की सूचना दी।
एजेंसियां पहुंचीं, पर ‘मदद’ नाकाफी
तिवारी के अनुसार, हाईवे पुलिस, कलेक्टर कार्यालय और कॉन्ट्रैक्टेड एक्सीडेंट-मॉनिटरिंग एजेंसी के लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन “फोटो ज्यादा, प्रत्यक्ष सहायता कम” रही। मौके पर पहुंची मेडिकल टीम में डॉक्टर मौजूद नहीं था-“केवल कंपाउंडर जैसे कर्मी” आए। इस बीच टो-ट्रक की कई निजी कॉल्स आने लगीं—किसी ने 5,000 रुपए, तो किसी ने 15,000 रुपए तक मांगे। तिवारी ने इसे “असंगठित और अपारदर्शी सिस्टम” बताया।
डकैती की आशंका पर क्या कहा
हादसे के तुरंत बाद पहुंचे युवकों के व्यवहार और घटना-स्थल के ब्लैकस्पॉट में होने के कारण तिवारी ने संगठित अपराध की आशंका जताई। “ऐसा लगा कि नेटवर्क-रहित जोन देखकर ही यह सब किया गया। पांच लोगों का अचानक आना, घूरना और फिर लौट जाना-ये सब संदेह बढ़ाते हैं,” उन्होंने कहा। पुलिस को सूचना देने और रिपोर्ट दर्ज कराने की प्रक्रिया पर भी स्पष्ट मार्गदर्शन न मिलने की शिकायत की गई।
30 दिनों में सुधारों की मांग
प्रो. तिवारी ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से 30 दिनों में ठोस रोडमैप लाने की अपील की है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं :
हर 50–60 किमी पर डॉक्टर-समेत ALS एम्बुलेंस, 15–20 मिनट की रिस्पॉन्स समय-सीमा (SLA)।
वन-नंबर इंटीग्रेटेड हेल्पलाइन; कॉल के बाद ETA-SMS अनिवार्य।
ऑन-स्पॉट मेडिकल ट्रायाज पहले, फोटो बाद में-स्पष्ट SOP।
मानकीकृत टो-रेट्स, QR-वेरिफिकेशन और अनिवार्य रसीद।
डिजिटल घटना-रिपोर्ट पीड़ित को तुरंत उपलब्ध।
कॉन्ट्रैक्टर्स का SLA ऑडिट, कमी पर दंड/ब्लैकलिस्टिंग।
हाई-रिस्क ड्राइविंग (बार-बार स्पीड बदलाव/हार्ड ब्रेक/लेन-वीव) पर ई-चलान।
टोल/एक्ज़िट पर वन-स्टॉप पीड़ित काउंटर—मेडिकल, इंश्योरेंस, कानूनी सहायता।
डैशकैम फुटेज की आधिकारिक स्वीकार्यता और सुरक्षित अपलोड पोर्टल।
पब्लिक डैशबोर्ड-रिस्पॉन्स-टाइम, ब्लैक-स्पॉट और हादसा आंकड़े।
“गोल्डन ऑवर” पर जोर
“समृद्धि महामार्ग का ढांचा अच्छा है, पर ‘गोल्डन ऑवर’ में सुस्ती जानलेवा हो सकती है। डॉक्टर-युक्त एम्बुलेंस, एकीकृत हेल्पलाइन और ट्रायाज-फर्स्ट SOP के बिना नागरिक असुरक्षित हैं,”
