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“अमेरिका में पीएचडी…और मुंबई में ‘पीएचडी इन विकृति’!”…बांद्रा के फाइव स्टार होटल में सनसनीखेज कांड

राजन पारकर / मुंबई 

एक जमाना था जब “बांद्रा” सुनते ही लोगों को बॉलीवुड की पार्टियां, सितारों के बंगले और चमचमाती रातें याद आती थीं। अब बांद्रा का नाम आते ही लगता है-“होटल में बुलाया… और फिर सीधे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज”-मानो कोई अपराध सीरीज का नया एपिसोड हो!
अमेरिका में पीएचडी कर रहे एक ‘होनहार’ युवक ने बांद्रा में ऐसा ‘रिसर्च प्रोजेक्ट’ अंजाम दिया कि मुंबई हिल गई।
जी हां, साहब अमेरिका के मशहूर यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रहे हैं-लेकिन लगता है उनका विषय था “यौन शोषण की मनोवृत्ति और धमकी प्रबंधन”! क्योंकि पढ़ाई के नाम पर होटल बुलाकर जो कुछ हुआ, उसकी परिणति वांद्रा पुलिस थाने में बलात्कार की शिकायत के रूप में हुई।
आरोपी 31 वर्षीय युवक अमेरिका के इलिनॉय विश्वविद्यालय, अर्बाना–शैम्पेन में पीएचडी कर रहा है। पिता किसी बड़ी बैंक में वरिष्ठ पद पर-यानी कागज़ों पर शिक्षा, संस्कार और प्रतिष्ठा-सब बढ़िया! मगर असल जिंदगी में साहब ने “शादी का झांसा” नामक पुराना, लेकिन असरदार नुस्खा अपनाया और युवती को अपने जाल में फंसा लिया।
लड़की को “स्टडी डिस्कशन” के बहाने बांद्रा के एक आलीशान होटल में बुलाया गया और फिर 1 जनवरी से 12 जून के बीच कई बार उसके साथ यौन शोषण किया गया, ऐसा आरोप है। इतना ही नहीं, अमेरिका में पढ़ाई के दौरान भी आरोपी ने उसका शोषण जारी रखा।
और फिर एक दिन पीड़िता को पता चलता है-साहब किसी दूसरी लड़की से शादी की बातें कर रहे हैं! जब उसने सवाल किया तो उन्होंने न सिर्फ धमकाया, बल्कि निजी तस्वीरें लीक करने की भी धमकी दी। यानी पीएचडी का अगला चैप्टर “ब्लैकमेल और डराना” था।
आखिरकार युवती ने अपनी मां को सब कुछ बताया और दोनों ने मिलकर वांद्रा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। आरोपी के ख़िलाफ़ बलात्कार का मामला दर्ज हो गया है, पुलिस जांच में जुटी है। लेकिन घटना के बाद लोगों की जुबान पर एक ही बात है-“यही है न्यू इंडिया का ग्लोबल एजुकेशन! डिग्री अमेरिका की…और सोच घटिया लोकल की!”
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि ऊंची डिग्रियां और विदेश की यूनिवर्सिटियां किसी के चरित्र की गारंटी नहीं होतीं। परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थानों को शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों को भी उतनी ही गंभीरता से पढ़ाना होगा, वरना अगला मामला “हार्वर्ड – दहिसर कनेक्शन” भी हो सकता है।
मुंबई का अपराध और अमेरिका की पीएचडी-क्या कमाल का ‘ग्लोबलाइजेशन’ है!
कभी बांद्रा में फिल्में बनती थीं… अब अपराध की पटकथाएं तैयार होती हैं। और हां, आरोपी साहब की थीसिस का नाम शायद यही होगा-“वासना, झूठ और होटल के कमरे: एक महाद्वीपीय अध्ययन।”

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