सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग में व्याप्त भ्रष्टचार के कारण राशन माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से गरीबों को घटिया अनाज मिल रहा है। जबकि राशनिंग अधिकारियों की तथाकथित मिली भगत से राशन दुकानों में आने वाला अच्छी क्वालिटी का चावल पॉलिश करके ऊंचे दामों पर बाजार में बेचा जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रâूड सप्लाई विभाग के भ्रष्ट अधिकारी राशन वितरण प्रणाली में सेंध लगाकर अपनी जेबें भर रहे हैं। हालांकि कुछ राशन दुकानदारों का कहना है कि इस भ्रष्टाचार के खेल में ऊपरी स्तर के अधिकारियों की भी मिलीभगत है। इसलिए वे इस घपले की ओर से आंख मूंदे हुए हैं।
बदल दी जाती है बोरियां
सूत्रों का कहना है कि कई बार राशन की दुकानों में पहुंचने से पहले ही अच्छी क्वालिटी के चावल की बोरियां बदल दी जाती हैं और उनके बदले घटिया क्वालिटी के चावल और गेंहूं की बोरियां भेज दी जाती हैं। इस मिलीभगत से महीने में करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे हो रहे हैं और दिवाली जैसे त्योहार के मौके पर आम जनता को घटिया क्वालिटी का चावल और गेंहू खाने को मजबूर होना पड़ा रहा है।
बताया जाता है कि अक्टूबर महीने में मुंबई सहित राज्य के अन्य शहरों की राशन दुकानों पर जो गेहूं और चावल आए हैं। वह पूरी तरह से घटिया क्वालिटी के है। गेहूं को पूरी तरह से अंदर से घुन खा चुका है और चावल की क्वालिटी अच्छी नहीं है। दिवाली के मौके पर राशन दुकानों से मिलने वाला गेहूं और चावल की घटिया क्वालिटी होने से आम जनता में महायुति सरकार के प्रति आक्रोश है।
