प्रेम यादव / भायंदर
मीरा-भायंदर-पूर्व का केबिन रोड अब शहर की ट्रैफिक समस्याओं का सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। फाटक से स्टेशन तक की सड़क कहीं चौड़ी तो कहीं इतनी संकरी है कि दो बड़ी गाड़ियां एक साथ गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। सुबह ऑफिस और स्कूल के समय, दोपहर को स्कूल छुट्टी के वक्त और शाम ७ से ९ बजे तक इस मार्ग पर जाम लगना अब आम बात हो गई है।
अवैध पार्किंग इस समस्या की सबसे बड़ी जड़ बन चुकी है। सड़क किनारे बेतरतीब खड़ी गाड़ियां वाहनों की आवाजाही में बाधा डालती हैं, जिससे मामूली रुकावट भी घंटों के जाम में बदल जाती है। बस, ट्रक और टेम्पो जैसे बड़े वाहनों की लगातार आवाजाही ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
स्थानीय निवासी जीतू पाटिल ने बताया, ‘केबिन रोड पर थोड़ी सी गड़बड़ी होते ही ट्रैफिक ठप पड़ जाता है। कभी-कभी एंबुलेंस तक फंस जाती है, लेकिन प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता।’
दिखावा करते हैं मनपा और ट्रैफिक विभाग
हर रोज जाम में फंसना स्थानीय प्रवासियों की दिनचर्या बन गई है। मनपा और ट्रैफिक विभाग बस दिखावा करते हैं, कोई स्थाई हल नहीं निकाला गया। लोगों का कहना है कि न तो मीरा-भायंदर महानगरपालिका और न ही ट्रैफिक कंट्रोल विभाग इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है। शिकायतें करने के बावजूद कार्रवाई सिर्फ कागजों में सिमटकर रह जाती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन चाहे तो कुछ ही दिनों में राहत दिलाई जा सकती है। सड़क किनारे अवैध पार्किंग हटाई जाए, भारी वाहनों के लिए समयबद्ध नियम बनाए जाएं और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाए। लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या प्रशासन केबिन रोड को जाम से मुक्त कराने की जिम्मेदारी लेगा या जनता यूं ही घंटों ट्रैफिक में फंसती रहेगी?
