मुख्यपृष्ठसमाचारभाजपा राज, खोखला `विकास'...कमर तक पानी कंधों पर लाश!

भाजपा राज, खोखला `विकास’…कमर तक पानी कंधों पर लाश!

-अंतिम संस्कार के लिए भी संघर्ष कर रहा है एमपी का गांव

भाजपा राज `विकास’ के कितने भी खोखले दावे क्यों न कर ले लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दृश्य बयां करती है। आज के डिजिटल दौर में भी कई गांवों में मूलभूत सुविधाएं लोगों से कोसों दूर हैं। इसी का ताजा उदाहरण हाल ही में देखने को मिला। जहां सड़क और पुल के अभाव में गांववाले कमर भर पानी में सफर कर कंधे पर लाश को ढोने को मजबूर हो गए। ऐसे में सवाल ये है कि आजादी के ७५ साल बाद भी अगर किसी गांव में अंतिम संस्कार करने के लिए नहर पार करनी पड़े, तो फिर विकास योजनाओं के दावे कितने सच्चे हैं?
दरअसल, बीते दिनों यहां ६५ साल की लीलाबाई सिंह का निधन हो गया। अंतिम संस्कार करने के लिए परिजन व ग्रामीण शव यात्रा लेकर श्मशान घाट की तरफ निकले। श्मशान घाट नहर की दूसरी तरफ था, जिस पर न ही कोई पुल था और न ही नहर पार करने के लिए नाव की कोई व्यवस्था। इसलिए, भारी मन से बुजुर्ग महिला की शवयात्रा में शामिल लोगों ने नहर में घुसकर पार किया। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। बता दें कि यह कोई एक दिन की बात नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बारिश के मौसम में यही स्थिति रहती है। नहर में पानी भर जाता है और जब गांव में किसी का निधन होता है तो शव यात्रा इसी तरह नदी पार करके शमशान घाट तक ले जानी पड़ती है। ग्राम सरपंच रामकुंवर बाई की मानें तो उनके गांव में शमशान घाट के लिए जगह नहीं है। इसलिए शमशान नदी के दूसरी तरफ बनाया गया है।
शिकायत के बाद भी अभी तक नहीं बनाई गई पुलिया
उन्होंने बताया कि पुलिया निर्माण के लिए विधायक से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखित में शिकायत दी गई और पुलिया बनवाने की अपील की गई, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई। सालों से गांव के लोग इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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