मुख्यपृष्ठस्तंभसब मसाला है : गजवा-ए-अफगान!

सब मसाला है : गजवा-ए-अफगान!

श्रीकिशोर शाही

जिस नफरत के बीज से जन्म लेकर जब से पाकिस्तान बना है, उसकी एक ही ख्वाहिश है और वो है `गजवा ए हिंद।’ अब सवाल है कि तुम तो थे ही हिंदुस्थान में, फिर अलग होकर ये खून बहाने की क्या जरूरत आन पड़ी? असल में आदमखोर को शाकाहार पसंद कहां? उसे तो बस मानव रक्त से मतलब है। अब वो चाहे यहां हो या चाहे वहां। भारत से बुरी तरह से लात खाने के बाद अब उसका मुंह पश्चिम की ओर घूम गया है। गजवा-ए-अफगान। अब वह अफगानिस्तान में अपना मुंह मार रहा है। हालांकि, वह वहां भी लात खा रहा है। तालिबान ने उसके टैंक छीन लिए, सैनिकों की पतलूनें उतार लीं। मगर बेहया को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। इज्जत हो तो कोई बेइज्जत हो। सीजफायर होने के बावजूद आदमखोर ने जुम्मे की रात फिर से अफगानिस्तान के तीन शहरों पर हवाई हमला कर दिया। इसमें सबसे बुरी बात ये हुई कि बमबारी में कई निर्दोष अफगानी क्रिकेटर मारे गए।
दरअसल, पाकिस्तान में इस समय बड़ी उथल-पुथल मची हुई है। देश में हर तरफ आग लगी हुई है और पाकिस्तान की तीनों सेना के प्रमुख असीम मुनीर, वायुसेना प्रमुख जहीर बाबर सिद्धू और नौसेना प्रमुख वीद अशरफ बारी-बारी से अमेरिका का दौरा कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में लगी चोट के बाद पाकिस्तान का पूरा पश्चिमी इलाका हलाकान है। बलोच रोज २-४ पाकिस्तानी सैनिकों को टपका रहा है। जिस तरह से तालिबान ने पाकिस्तानी सैनिकों की पतलून उतारकर उसकी नुमाइश लगाई है वह वाकई हैरान करनेवाला है। यह १९७१ के बांग्लादेश वॉर की याद दिलाता है। रही-सही कसर तहरीके लब्बैक ने पूरी कर दी है। ऐसे समय में पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ तो कभी एयर चीफ तो कभी नेवी चीफ अमेरिका का दौरा कर रहे हैं। असल में भारत से पारंपरिक युद्ध लड़ना पाकिस्तान के बीएस की बात नहीं है। फिर कोई तो दुश्मन चाहिए जिसके साथ गजवा उजवा किया जाए। मगर कहीं ऐसा न हो जाये कि अमेरिका ने बगराम में जो ८० बिलियन डॉलर का हथियार छोड़ा था, तालिबान उसका इस्तेमाल इस आदमखोर के खिलाफ कर डाले। अब इसमें यह देखना दिलचस्प होगा कि वो पाव-पाव किलो वाले बमों का क्या होता है, यूं ही थैली में सड़ते रहेंगे या अल्लाह-ओ-अकबर बोलकर मिशन गजवा-ए- अफगानिस्तान के तहत ये आदमखोर उछालने की हिम्मत जुटाएगा?

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