एक लकड़ी का संदूक, टूटे कुंडे, तीन देग, तीन बड़े कलश, एक परात, 4 बड़े पत्थर गोलाकार, एक लकड़ी का तख्त, संदूक में दो बक्से गहने रखने वाले, 2 फरवरी 1970 का पत्र
डॉ. कमल कान्त उपमन्यु
मथुरा। बांके बिहारी महाराज मंदिर के तोशखाने को धनतेरस के अवसर पर खोला गया। खजाने की रक्षा कर रहे काले सांप की वजह से कार्यवाही कुछ देर के लिए रोक दी गई। वन विभाग की टीम ने सांप का रेस्क्यू किया। इसके बाद खजाने से सामान निकालना शुरू हुआ।
हाई पावर्ड मंदिर प्रबंधन कमेटी के आदेश पर धनतेरस पर शनिवार को ये खजाना खोला गया। वहीं, टीम का विरोध करते हुए गोस्वामियों ने हंगामा किया। गोस्वामी मांग कर रहे थे कि ताशखाने के अंदर जो भी प्रक्रिया की जा रही है, उसे मंदिर के बाहर स्क्रीन लगाकर लाइव किया जाए।
बांकेबिहारी मंदिर खजाने में एक लकड़ी का संदूक, टूटे कुंडे, तीन देग, तीन बड़े कलश, एक परात, 4 बड़े पत्थर गोलाकार, एक लकड़ी का तख्त, संदूक में दो बक्से गहने रखने वाले, 2 फरवरी 1970 का पत्र, एक चांदी का छोटा सा छत्र मिला है।
जानकारी के अनुसार तोशखाने में प्रवेश करने के लिए पहुंची टीम को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खजाना 54 वर्षों से बंद पड़ा था, ऐसे में अंदर क्या है इस बारे में किसी को भी जानकारी नहीं थी। जब खजाने का दरवाजा खोला गया तो धूल और गंदगी के साथ गैस भी बन गई थी। ऐसे में टीम को काफी सावधानी के साथ अंदर प्रवेश करना पड़ा। फांवड़ा चलाकर मिट्टी को हटाया गया। इसी दौरान काला सांप निकल आया, जिससे कार्य कुछ देर के लिए प्रभावित हुआ। सांप के डर की वजह से टीम वहां से भाग खड़ी हुई। वन विभाग की टीम को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे वनकर्मियों ने सांप को खजाने के अंदर से रेस्क्यू किया। इसके बाद टीम फिर से खजाने के अंदर घुसी। सामान निकालने का कार्य शुरू किया गया।
