भाजपा MLA मंदा म्हात्रे का गंभीर आरोप
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में फर्जी और डबल नाम वाले मतदाताओं को लेकर राजनीतिक माहौल गरम है। अब तो खुद सत्ताधारी भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे ने विपक्ष के वोट चोरी के आरोपों पर मुहर लगा दी है। उनका कहना है कि बेलापुर में २० हजार बोगस वोटर हैं।
इस मामले में मंदा म्हात्रे ने कहा, ‘मैंने २००४, २००९ और २०१४, तीनों चुनावों में बेलापुर से चुनाव लड़ा है। हर बार चुनाव से पहले अधिकारियों को फर्जी और डबल नामों की सूची सौंपी गई थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।’
फर्जी वोटर बनाए जाने
पर चुनाव आयोग मौन!
-भाजपा विधायक का जोरदार आरोप
चुनाव से पहले पैसों के दम पर हजारों फर्जी मतदाता बनाए जा रहे हैं और प्रशासन तथा चुनाव आयोग मूकदर्शक बने हुए हैं
बेलापुर में फर्जी वोटर्स का मामला सामने आया है। इस मामले में भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से पहले पैसों के दम पर हजारों फर्जी मतदाता बनाए जा रहे हैं और प्रशासन तथा चुनाव आयोग मौन साधे हुए है। वह मूकदर्शक बनकर सबकुछ देखता रहता है। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में पैसे लेकर फर्जी पंजीकरण में चुनाव अधिकारियों की सीधी संलिप्तता का आरोप लगाया है।
राज्य की राजनीति में फर्जी और नकली मतदाताओं को लेकर पैदा हुए तनाव की पृष्ठभूमि में भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे ने प्रशासन पर सीधे तौर पर ये गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा विधायक मंदा म्हात्रे ने कहा कि बोगस वोटर्स से ईमानदार उम्मीदवारों को चुनाव में अन्याय का सामना करना पड़ता है। अब भाजपा विधायकों द्वारा सीधे तौर पर फर्जी मतदान का मुद्दा उठाए जाने के बाद से यह चर्चा गरमा गई है। उन्होंने कहा, ‘मतदाता सूची की पारदर्शी जांच कोई मुश्किल काम नहीं है। बस प्रशासन को इच्छाशक्ति और ईमानदारी दिखानी होगी।’ भाजपा की ही विधायक द्वारा लगाए गए इन आरोपों से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विधायक मंदा म्हात्रे ने आगे कहा कि कई बार जिला कलेक्टर, चुनाव अधिकारी और बीएलओ को सूचित करने के बावजूद वही नाम सूची में फिर से दिखाई देते हैं।
लेन-देन में अफसर शामिल
उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर अधिकारी इन नामों के पंजीकरण में शामिल होते हैं और अक्सर इसमें पैसे का लेन-देन होता है। इन फर्जी नामों के कारण, सुबह के सत्र में मतदान होता है और ईमानदार उम्मीदवार प्रभावित होते हैं। मतदाता अक्सर कहते हैं कि किसी ने हमारा मतदान पहले ही कर लिया है, इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। चुनाव प्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए।
कलेक्टर ने नहीं की कार्रवाई
कई बार कलेक्टर, चुनाव अधिकारी, बीएलओ को सूचित करने के बावजूद, वही नाम सूची में फिर से दिखाई देते हैं। मैंने खुद सर्वेक्षण किया और लगभग २० हजार ऐसे नामों की खोज की और कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन उन नामों को सूची से बाहर नहीं किया गया।
