अनिल मिश्र/रांची
बिहार और झारखंड के आयकर संग्रह में झारखंड का सबसे बड़ा योगदान रहा है। निर्धारित 20 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य में करीब 12 हजार करोड़ रुपये झारखंड से, जबकि 8 हजार करोड़ रुपये बिहार से प्राप्त हुए। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भी 20 हजार करोड़ रुपये कर संग्रह का लक्ष्य तय किया गया है।
पिछले वित्तीय वर्ष में टैक्स चोरी के मामलों में 12 बड़े कारोबारी समूहों पर छापेमारी की गई। इन कार्रवाइयों में 150 से अधिक व्यापारी और कारोबारी शामिल थे। इसके अलावा झारखंड और बिहार में कर चोरी और आयकर नहीं चुकाने से जुड़े 90 से अधिक मामलों में विभिन्न व्यक्तियों और व्यापारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हालांकि, संबंधित लोगों और कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में करीब 5 प्रतिशत कम टैक्स संग्रह हुआ। इसका मुख्य कारण कम बारिश के चलते सीसीएल में खनन कार्य प्रभावित होना और टैक्स स्लैब में बदलाव माना गया है।
रांची दौरे के दौरान अधिकारियों ने बताया कि नया आयकर अधिनियम 2025 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। इसके प्रावधानों और संशोधनों की जानकारी करदाताओं तक पहुंचाने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट, व्यावसायिक संगठनों और अन्य समूहों के साथ विचार-विमर्श किया गया। साथ ही बिहार-झारखंड के आयकर अधिकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं भी जानी गईं।
आंकड़ों के अनुसार, बिहार-झारखंड क्षेत्र में करीब 40 लाख लोग नियमित रूप से आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, जबकि पैन कार्ड धारकों की संख्या लगभग 5 करोड़ है। इनमें से करीब 70 प्रतिशत लोग ही वास्तविक करदाता हैं।
इस बीच, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी बिहार-झारखंड क्षेत्र में सबसे बड़े व्यक्तिगत टैक्सपेयर का स्थान बरकरार रखा है। यह जानकारी झारखंड और बिहार के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त डॉ. डी. सुधाकर राव ने रांची में दी।
गोपनीयता के कारण धोनी द्वारा चुकाए गए कर की सटीक राशि का खुलासा नहीं किया गया, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने वित्तीय वर्ष 2023-24 में करीब 38 करोड़ रुपये का टैक्स अदा किया था।
वहीं, कॉर्पोरेट श्रेणी में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड और सीएमपीडीआई जैसी कंपनियां सबसे अधिक कर चुकाने वालों में शामिल रही हैं।
