श्रीकिशोर शाही
(बुंगा बुंगा-२०)
जैसे-जैसे मिलान की अदालत में बर्लुस्कोनी के खिलाफ सबूतों का पहाड़ खड़ा हो रहा था, उनका अहंकार और बेशर्मी भी चरम सीमा पार करने लगी थी। एक आम अपराधी शायद इन सबूतों के आगे टूट जाता, लेकिन सिल्वियो बर्लुस्कोनी इटली के सबसे बड़े ‘सेल्समैन’ थे। उन्होंने अदालत और मीडिया के सामने अपना जो बचाव पेश किया, वह उनके शातिर दिमाग और सत्ता के नशे का जीता-जागता प्रमाण था।
बर्लुस्कोनी ने अदालत में सीना तानकर कहा कि ‘बुंगा बुंगा’ पार्टियां कोई अय्याशी का अड्डा नहीं थीं, बल्कि बेहद ‘सभ्य और शालीन डिनर’ वाली पार्टी थी। उन्होंने दावा किया कि उन महफिलों में खाना, संगीत और हल्की-फुल्की हंसी-मजाक के अलावा कुछ नहीं होता था। रूबी को पैसे और गहने देने के सवाल पर उन्होंने एक ऐसा हास्यास्पद झूठ गढ़ा, जिसने सबको हैरान कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मैंने रूबी को पैसे उसके साथ सोने के लिए नहीं दिए थे। मुझे उसकी गरीबी पर दया आ गई थी और मैंने उसे एक ब्यूटी पार्लर (लेजर हेयर रिमूवल क्लिनिक) खोलने के लिए मदद के तौर पर वे पैसे दिए थे।’
बर्लुस्कोनी ने सारा ठीकरा इटली के ‘वामपंथी जजों’ पर फोड़ दिया। उन्होंने खुलेआम आरोप लगाया कि मिलान के कम्युनिस्ट जज उनके खिलाफ एक राजनीतिक साजिश रच रहे हैं, ताकि उन्हें सत्ता से बेदखल किया जा सके। हालांकि, उनका यह बेशर्म बचाव दुनिया के सामने टिक नहीं सका। इटली की जनता और अदालतें अब उनकी इस झूठी बयानबाजी से पूरी तरह ऊब चुकी थीं। उनके अपने सहयोगी और मंत्री भी अब सार्वजनिक रूप से उनका बचाव करने से कतराने लगे थे। झूठ का जो तिलिस्म उन्होंने दशकों तक बुना था, वह अब पूरी तरह चकनाचूर हो रहा था।
(शेष अगले अंक में)
