-अब कहां जाएं अरब देश?
सूफी खान
जंग खत्म हुई, समझौता हो गया, लेकिन अब अमेरिका की दोस्ती पर उसके मिडिल ईस्ट के दोस्त ही सवाल उठा रहे हैं। आरोप है कि ईरान के साथ डील करने के चक्कर में डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा वादा कर दिया है, जिससे उनके सबसे करीबी खाड़ी सहयोगी नाराज हो गए हैं। डील के मुताबिक, ईरान को ३०० अरब डॉलर यानी करीब २५ लाख करोड़ रुपए का फंड दिया जाना है, अब देशों को डर है कि कहीं यह पैसा ईरान को पहले से ज्यादा ताकतवर न बना दे। यही वजह है कि अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो खुद डैमेज कंट्रोल मिशन पर उतर गए हैं।
अरब मुल्कों की भी फिक्र अपनी सुरक्षा को लेकर है। उनका मानना है कि ईरान इस धन का इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने, मिसाइल कार्यक्रम को मजबूत करने और आधुनिक हथियार खरीदने में कर सकता है। खासतौर पर इसलिए भी क्योंकि डील में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर किसी नई रोक की चर्चा नहीं है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच हुई नई डील के पेपर सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है। सबसे ज्यादा चर्चा उस प्रस्ताव की हो रही है, जिसके तहत ईरान के पुनर्निर्माण के लिए ३०० अरब डॉलर का फंड देने की बात कही जा रही है।
दावा है कि यह फंड युद्ध से प्रभावित ईरान की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। गल्फ देशों को डर है कि अमेरिका इस रकम का बिल भी उन्हीं पर फाड़ेगा और अगर ईरान ने इसका इस्तेमाल अपने हथियारों को दुरुस्त करने में कर दिया तो आगे के लिए मुसीबत हो जाएगी। ४० दिनों की जंग में भी ईरान की मिसाइलें सबसे ज्यादा अरब देशों पर बरसीं थी।
इसी बढ़ती बेचैनी के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो यूएई पहुंचे। अबू धाबी में उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ लंबी बातचीत की।
स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत की कमान अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस के हाथ में थी। ऐसे में अब रूबियो को एक तरफ ट्रंप की कूटनीति का बचाव करना है और दूसरी तरफ अमेरिका के पुराने सहयोगियों का भरोसा भी कायम रखना है।
फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका की नई ईरान नीति उसके पुराने अरब सहयोगियों को असुरक्षित महसूस करा रही है? क्या मार्को रूबियो अपने नाराज दोस्तों को भरोसा दिलाने में कामयाब होंगे? क्योंकि मिडिल ईस्ट की राजनीति में सिर्फ एक डील नहीं, बल्कि भरोसे का समीकरण भी दांव पर लगा हुआ है।
