-धारा ११२, ११३ और ११४
-भाग:३८
एड. कनई बिस्वास
कई अपराध ऐसे होते हैं, जिन्हें एक व्यक्ति अकेले नहीं, बल्कि समूह बनाकर अंजाम देता है। ऐसे मामलों में कानून केवल मुख्य आरोपी को ही नहीं, बल्कि उसके साथ शामिल हर व्यक्ति की भूमिका और जिम्मेदारी को भी देखता है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), २०२३ की धारा ११२, ११३ और ११४ सामूहिक अपराध और उससे जुड़ी जिम्मेदारी को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी- १: ‘एक उकसावे से कई अपराध’ (धारा ११२)
कुछ लोगों को केवल चोरी के लिए उकसाया गया था, लेकिन वारदात के दौरान उन्होंने मारपीट और तोड़-फोड़ भी कर दी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या एक ही उकसावे से कई अपराध हुए? क्या अतिरिक्त अपराध संभावित थे? क्या आरोपी को ऐसे परिणाम की आशंका हो सकती थी?
फैसला- यह कई अपराधों के लिए जिम्मेदारी का मामला है। समझें: धारा ११२ के तहत यदि एक उकसावे से कई अपराध हो जाएं, तो उकसाने वाला उन सभी परिणामों के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
केस स्टडी-२: ‘इरादा कुछ और, परिणाम अधिक गंभीर’ (धारा ११३)
एक व्यक्ति ने अपने साथी को किसी को डराने के लिए भेजा, लेकिन उसने गुस्से में आकर पीड़ित को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या वास्तविक परिणाम अपेक्षा से अधिक गंभीर था? क्या ऐसा परिणाम संभव था? क्या आरोपी ने स्थिति पैदा की?
फैसला- यह गंभीर परिणाम के लिए जिम्मेदारी का मामला है। समझें: धारा ११३ के अनुसार, यदि उकसावे के कारण अपेक्षा से अधिक गंभीर परिणाम हो जाए, तो उकसाने वाला भी उसके लिए जिम्मेदार हो सकता है।
केस स्टडी- ३: ‘घटनास्थल पर मौजूद उकसाने वाला’ (धारा ११४)
एक व्यक्ति ने अपराध की योजना बनाई और वारदात के समय घटनास्थल पर मौजूद रहा, जबकि उसके साथी अपराध कर रहे थे।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी घटनास्थल पर मौजूद था? क्या उसकी उपस्थिति से अपराध को बल मिला? क्या वह पहले से योजना का हिस्सा था?
फैसला- यह मुख्य अपराध में सहभागिता का मामला है। समझें: धारा ११४ के तहत यदि उकसाने वाला घटनास्थल पर मौजूद हो, तो उसे मुख्य अपराधी के समान माना जा सकता है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि अपराध केवल करने वाला ही नहीं, बल्कि उसकी योजना, उकसावे और सहयोग से जुड़ा हर व्यक्ति कानून की नजर में जिम्मेदार हो सकता है। यानी भीड़ या समूह के पीछे छिपकर अपराध करनेवालों के लिए कानून में अलग से सख्त व्यवस्था मौजूद है।
(अगले अंक में: धारा ११५, ११६ और ११७ – ‘साजिश, उकसावा और भीड़ को भड़काने के अपराध’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)
