मुख्यपृष्ठसमाचारफाइलों में कैद है लाखों लोगों के पक्के घरों का सपना!

फाइलों में कैद है लाखों लोगों के पक्के घरों का सपना!

-झुग्गीवासियों को फिर दिखाए गए बड़े सपने

-मंजूरियों की भूलभुलैया में फंसी योजना

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई की झुग्गियों के पुनर्विकास को लेकर एक बार फिर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि लाखों झुग्गीवासियों के सिर पर पक्की छत का सपना अभी भी सरकारी मंजूरियों और लंबी प्रक्रियाओं के जाल में उलझा हुआ है। स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) ने माजासवाड़ी (अंधेरी पूर्व), बेहरामपाड़ा (बांद्रा पूर्व) और वडाला ट्रक टर्मिनल के क्लस्टर रीडेवलपमेंट का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। दावा किया जा रहा है कि इस योजना से करीब ६ से ७ लाख लोगों के जीवन में बदलाव आएगा और उन्हें पक्के घर मिलेंगे।
लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि योजना अभी शुरुआती चरण में ही अटकी हुई है। एसआरए अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना की अंतिम सीमाएं और इसमें शामिल झुग्गियों की सटीक संख्या तक तय नहीं हो सकी है। फिलहाल जमीन का सीमांकन किया जा रहा है। इसके बाद प्रस्ताव को राज्य सरकार की हाई पावर कमेटी (एचपीसी) के समक्ष रखा जाएगा, जहां से अंतिम मंजूरी मिलनी है।
गौरतलब है कि नवंबर २०२५ में शुरू की गई इस क्लस्टर रीडेवलपमेंट योजना का उद्देश्य कम से कम ५० एकड़ के बड़े झुग्गी क्षेत्रों का एक साथ नियोजित विकास करना है। सूत्रों के अनुसार, इन तीनों परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल १५० एकड़ से अधिक हो सकता है। एसआरए ने मुंबई के ऐसे १९ झुग्गी क्षेत्रों की पहचान की है, जहां बड़े पैमाने पर पुनर्विकास किया जाना है। योजना के तहत झुग्गीवासियों को पक्के घर, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और आधुनिक शहरी ढांचा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
हाल ही में एसआरए ने जुहू लेन-गिल्बर्ट हिल के १०१ एकड़ क्षेत्र के पुनर्विकास का ठेका रिलायंस समूह की कंपनी को दिया है, जहां २८ हजार से अधिक पुनर्वास आवास बनाने की योजना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतरती है तो मुंबई की झुग्गी समस्या के समाधान की दिशा में यह बड़ा कदम साबित हो सकता है। लेकिन फिलहाल करोड़ों रुपये की योजनाओं और बड़े-बड़े वादों के बीच लाखों झुग्गीवासियों के लिए पक्के घर का सपना सरकारी फाइलों और मंजूरियों के चक्र में वैâद नजर आ रहा है।
फाइलों में अटका ७ लाख लोगों के घर का सपना
मुंबई की तीन बड़ी झुग्गी पुनर्विकास योजनाओं से ६ से ७ लाख लोगों को पक्के घर मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन परियोजनाएं अभी मंजूरी और सीमांकन की प्रक्रिया में फंसी हैं। बड़े वादों के बीच झुग्गीवासियों का आशियाने का सपना फिलहाल सरकारी फाइलों में कैद है।

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