-हाई कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों से मांगा जवाब
-ट्रांसमिशन लाइन के काम में पर्यावरण को नुकसान
-पुनर्वनरोपण के भी दिए निर्देश
जेदवी / मुंबई
मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण कार्य के दौरान मैंग्रोव को हुए नुकसान पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित एजेंसियों को फटकार लगाई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठा कि ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के कार्य में कुछ मैंग्रोव पेड़ गिर गए या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस पर हाई कोर्ट ने सवाल किया कि क्या यह कार्य निर्धारित अनुमति के अनुरूप किया गया था या फिर लापरवाही के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंचा। अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी सहित अन्य संबंधित पक्षों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
हाईकोर्ट ने प्रभावित मैंग्रोव के बदले अनिवार्य रूप से पुनर्वृक्षारोपण (री-प्लांटेशन) करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने दोहराया कि विकास परियोजनाएं निश्चित रूप से जरूरी हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी नहीं की जा सकती। विशेष रूप से मैंग्रोव जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही तटीय क्षेत्रों को बाढ़ और तूफानों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मैंग्रोव कटाई को लेकर अदालत सख्त शर्तें लगा चुकी है, जिनमें बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण की शर्त शामिल थी। इस प्रकरण ने एक बार फिर ‘विकास बनाम पर्यावरण’ की बहस को तेज कर दिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विकास की रफ्तार तभी स्वीकार्य होगी, जब उसके साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी पूरी ईमानदारी से निभाई जाए।
मैंग्रोव नुकसान पर हाई कोर्ट सख्त
मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के दौरान मैंग्रोव को हुए नुकसान पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने संबंधित एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी और प्रभावित मैंग्रोव के बदले अनिवार्य पुनर्वृक्षारोपण का निर्देश देते हुए पर्यावरणीय नियमों के पालन पर जोर दिया।
