-जिलाधिकारी ने सौंपी राजस्व मंत्री को रिपोर्ट
-रिपोर्ट में नरेंद्र मेहता के कई चौंकाने वाले खुलासे
सुरेश गोलानी / भायंदर
ठाणे के जिलाधिकारी तथा जिला मजिस्ट्रेट ने राजस्व मंत्री को एक जांच रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें मीरा-भायंदर क्षेत्र में आदिवासी जमीनों की खरीद-बिक्री में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में आदिवासी जमीनों के अवैध हस्तांतरण, सभी संबंधित पक्षों को अवसर न देने, राजस्व अभिलेखों में त्रुटियों और भूमि लेन-देन के आवश्यक सत्यापन के अभाव का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।
गौरतलब है कि जांच रिपोर्ट में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता का इस मामले में लिप्त होने का भी आरोप हैं। काशीमीरा क्षेत्र में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित वारसावे गांव में पुरानी आदिवासी बस्तियां हैं। यहां के आदिवासी समाज के भू मालिकों ने राजस्व मंत्री से शिकायत की थी कि उनकी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इस शिकायत के आधार पर राजस्व मंत्री ने ठाणे जिलाधिकारी को इस पूरे मामले की गहन छानबीन हेतु एक स्वतंत्र जांच समिति नियुक्त करने का आदेश दिया। समिति ने वारसावे में संबंधित आदिवासी जमीनों के सर्वे क्रमांकों के दस्तावेजों की जांच की और एक रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आदिवासी जमीनों को गैर-आदिवासी व्यक्तियों और कंपनियों को हस्तांतरित कर दी गई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित जमीनों पर सेवन इलेवन होटल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित पक्षों का कब्जा है। इस कंपनी का मालिकाना हाक भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता और उनके परिवार का है, जबकि प्रशांत केलुस्कर और सूर्यकांत सर्वे निदेशक के पदों पर विराजमान हैं।
क्या कहते है विधायक?
आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने यह दावा किया है कि इस संबंध में, शिकायतकर्ताओं की शिकायत समाधान कर दिया गया था। उन्होंने इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट को लिखित पत्र भी दिया है, जिसकी कॉपी शीघ्र ही उपलब्ध करा दी जाएगी’ जिससे यह साबित हो जाएगा कि व्यवहार में कोई भी गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है।
क्या कहती है समिति की जांच रिपोर्ट?
जांच के दौरान राजस्व विभाग के कामकाज में कई खामियां उजागर हुई हैं। समिति ने मुख्य रूप से तीन मामलों पर अपनी राय को प्रमुखता से दर्ज किया है जिनमें भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता की सेवन इलेवन होटल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता विनायक माली ने मौजे वरसावे स्थित भूमि सर्वे नंबर ६७/३ के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। समिति ने स्पष्ट किया है कि संबंधित हस्तांतरण ट्रांसफर प्रक्रिया में सभी वारिसों को पक्षकार नहीं बनाया गया और न ही उन्हें सुनवाई का अवसर दिया गया।
