अरुण कुमार गुप्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगता है जैसे भारत की इंटरनेशनल बेइज्जती का ठेका ले लिया है। यह बातें हम नहीं कह रहे हैं बल्कि, हाल ही में अमेरिकन एआई कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और सीईओ डारियो अमोदे के एक पॉडकास्ट से सामने आई है। यहां बता दें कि कुछ माह पहले नई दिल्ली में एआई समिट हुआ था, जिसमें दुनिया भर की एआई कंपनियों ने हिस्सा लिया था। इसी आयोजन में डारियो अमोदे भी शामिल हुए थे। उन्होंने एआई समिट में फोटो सेशन के दौरान मची भगदड़ की पोल खोल कर रख दी। पॉडकास्ट के दौरान अमोदे ने कहा कि हम लोगों को फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया गया था। हम लोग जिस पोजीशन पर खड़े थे, उस पोजीशन को नरेंद्र मोदी ने बदलवा दिया। फोटो सेशन के समय नरेंद्र मोदी ने कहा कि सभी लोग एक दूसरे का हाथ पकड़ कर हवा में उठा लें। यह सब करना सभी के लिए काफी नागवार लग रहा था। जब पॉडकास्ट में यह सब बातें अमोदे कर रहे थे। एक तरह से नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ा रहे थे। सबसे बड़ी बात उन्होंने नरेंद्र मोदी संबोधन के समय नाम के आगे न तो प्रधानमंत्री कहा और नहीं श्री लगाया। सीधे नरेंद्र मोदी कह कर संबोधन कर रहे थे। यह सच्चाई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश हो या विदेश सभी कार्यक्रमों को पीआर हब बना देते हैं। जैसे चुनावी रैलियों में सभी गठबंधन के नेता मंच पर हाथ मिलाकर ऊपर करते हैं। इस तरह नरेंद्र मोदी ने एआई समिट में कंपनियों के सीईओ को नेता बना दिया। ऐसे में नरेंद्र मोदी ने एक तरह से देश की इंटरनेशनल बेइज्जती ही की है। उनकी फोटो सेशन और पीआर की हवस कब खत्म होगी ऊपर वाला ही जाने।
बीजेपी के अच्छे दिन!
देश में किसी के अच्छे दिन आए हों या नहीं, लेकिन बीजेपी के अच्छे दिन जरूर आए हैं। यह बातें हम इसलिए कह रहे हैं कि २०१४ में सत्ता में आने के बाद बीजेपी के खजाने में बेशुमार संपत्ति बढ़ी है। या यूं कहें कि भाजपा के पास पैसे रखने की भी जगह नहीं बची है। आपको हम याद दिला दें कि सभी राजनीतिक दलों को अपने अकाउंट का हर साल ऑडिट करना होता है और उसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास सौंपी जाती है। दुनिया की सबसे बड़ी पॉलीटिकल पार्टी बीजेपी की ऑडिट रिपोर्ट देखने के बाद आंखें फट जाती हैं। २०१४ में जहां बीजेपी के पास ८४ करोड़ के असेट्स थे। वहीं अब बढ़कर १,२०० करोड़ से भी ज्यादा हो गए हैं और ४०० करोड़ पर काम चालू है। अब वैâश की बात करें तो २०१४ में बीजेपी के पास ७१३ करोड़ रुपए वैâश थे जो बढ़कर ७,००० करोड़ तक पहुंच गया है। यानी १० गुना वृद्धि। चंदे की बात करें तो २०१४ में बीजेपी के खजाने में चंदे से ६४० करोड़ रुपए मिले थे। वहीं २०२३-२४ में ३,९०० करोड़ रुपए मिले। अब बात समझिए, कोई इतनी बड़ी रकम चंदे के रूप में क्यों देगा। उदाहरण के तौर पर हम टाटा की बात करते हैं। टाटा कंपनी को सेमीकंडक्टर की पैâक्ट्री लगाने के लिए सरकार ने ४४,००० करोड़ रुपए की सब्सिडी दी थी। उसके चार हफ्ते बाद उसने भाजपा को ७५८ करोड़ रुपए चंदा दिया। पिछले चुनाव में बीजेपी ने १,७०० करोड रुपए खर्च किए। ५०० करोड़ तो सिर्फ मीडिया पर लुटा डाले। अब आप सोचिए, बीजेपी सत्ता में आने के लिए क्या कुछ नहीं करती है। सत्ता में आने के बाद खजाने में जैसे कुबेर का धन बरसने लगा है। आगे का वैâलकुलेशन आप करिए।
