मुंबई। बांद्रा-वर्ली सी-लिंक से समुद्र में छलांग लगाने वाले ठाणे निवासी ५१ वर्षीय कारोबारी की मौत ने एक बार फिर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव के बीच गहराते संबंध पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस को प्रारंभिक जांच में आशंका है कि कारोबार में हुए आर्थिक नुकसान के कारण वह तनाव में थे। वर्ली पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर उनके व्यवसाय, कर्ज और पारिवारिक परिस्थितियों की जांच शुरू की है।
इस घटना को केवल एक व्यक्ति का निजी निर्णय बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछले कुछ वर्षों में किसानों, खेतिहर मजदूरों और दिहाड़ी कामगारों की आत्महत्या की घटनाएं लगातार चिंता का विषय रही हैं। अब छोटे व्यापारियों, स्वरोजगार करने वालों और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भी कर्ज, कारोबार की अनिश्चितता, बढ़ते घरेलू खर्च तथा आय में अस्थिरता का दबाव दिखाई देने लगा है।
हालांकि, देश के आर्थिक विकास और महंगाई के सरकारी आंकड़े एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं, लेकिन प्रत्येक परिवार और व्यवसाय का वास्तविक अनुभव अलग हो सकता है। रोजमर्रा की वस्तुओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और परिवहन पर बढ़ता खर्च मध्यमवर्ग की बचत को प्रभावित करता है। दूसरी ओर छोटे व्यापारियों को किराया, कर्मचारियों का वेतन, बिजली, कर, कर्ज की किस्त और बाजार की प्रतिस्पर्धा जैसे अनेक मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ता है। रिजर्व बैंक से संबंधित नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च २०२५ तक घरेलू कर्ज बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद के ४१.३ प्रतिशत तक पहुंच गया था, जो पांच वर्षों के औसत से अधिक है। एमएसएमई क्षेत्र में वित्तीय तनाव के शुरुआती संकेतों के कारण बैंकों के अधिक सतर्क होकर ऋण देने की खबरें भी सामने आई हैं। इसका असर विशेष रूप से उन छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है, जो कार्यशील पूंजी के लिए ऋण पर निर्भर रहते हैं। इसके बावजूद यह कहना जल्दबाजी होगी कि सी-लिंक की घटना का कारण केवल महंगाई या देश की आर्थिक स्थिति थी। पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कारोबारी को कितना नुकसान हुआ था, उन पर कितना कर्ज था और क्या उन्हें किसी व्यक्ति या वित्तीय संस्था की ओर से दबाव का सामना करना पड़ रहा था।
व्यापारी संकट पर कब जागेगी सरकार?
सरकार और बैंकों को संकटग्रस्त छोटे व्यापारियों के लिए गोपनीय वित्तीय परामर्श, कर्ज पुनर्गठन, अस्थायी राहत और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की संयुक्त व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। जिस प्रकार किसानों के आर्थिक संकट पर विशेष योजनाओं की चर्चा होती है, उसी तरह छोटे व्यापारियों और स्वरोजगार करने वालों के लिए भी समय रहते सहायता का तंत्र बनाना जरूरी है।
