हनीफ जवेरी
फ़िल्म इंडस्ट्री में दिग्गज कलाकार अपनी छवि बनाए रखने के लिए अपने बराबरी के कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर करने से कतराते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह होती है, अपनी स्टार पावर को बनाए रखना और दर्शकों के बीच अपनी पकड़ को कमजोर न होने देना। उदाहरण के तौर पर, फिल्म पैगाम के बाद करीब ३५ वर्षों तक दिलीप कुमार और राज कुमार एक साथ किसी फिल्म में काम करने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्हें यह डर था कि कहीं दोनों में से कोई एक-दूसरे पर भारी न पड़ जाए।
राजेश खन्ना भी इसी सोच की वजह से संजीव कुमार के साथ काम करने से बचते थे। इसी कारण उन्होंने फिल्म आनंद से संजीव को हटवाया और बाबू मोशाय वाला किरदार अमिताभ बच्चन को मिल गया, लेकिन जब अचानक यह खबर आई कि राजेश खन्ना और संजीव कुमार एक साथ फिल्म आप की कसम में काम करने जा रहे हैं, तो कई लोगों को आश्चर्य हुआ। यही नहीं, कुछ लोगों ने यह भी भविष्यवाणी कर दी कि अब फिल्म आप की कसम बनना मुश्किल है। लोगों ने अपने-अपने हिसाब से ऐसा अनुमान इसलिए भी लगाया, क्योंकि यह निर्माता जे. ओमप्रकाश की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी और उनके लिए इन दो दिग्गज कलाकारों को संभाल पाना इतना आसान नहीं था, क्योंकि दोनों का करियर अपने चरम पर था। निर्माता जे. ओमप्रकाश का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट फिल्म आप की कसम था। उन्होंने मलयालम फिल्म वाज्वे मायम के रीमेक अधिकार खरीदे थे और इस फिल्म के माध्यम से स्वयं को एक निर्देशक के रूप में स्थापित करना चाहते थे, लेकिन फिल्म शुरू होने से पहले ही राजेश-संजीव के आपसी टकराव की खबर सुनकर ओमप्रकाश भी घबरा गए। कई दोस्तों ने उन्हें कलाकारों को बदलने की सलाह तक दी।
जे. ओमप्रकाश दुविधा में पड़ गए। काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने यह पैâसला किया कि फिल्म खन्ना और संजीव को लेकर ही शुरू करेंगे। पहला सीन वही रखा गया, जिसमें खन्ना अपने मित्र कुमार को शक की वजह से थप्पड़ मारता है। उन्होंने सोचा कि अगर पहले शूटिंग शेड्यूल में कोई गड़बड़ी होती है, तो किसी एक को हटाकर दूसरे अभिनेता को साइन कर लिया जाएगा। मेहबूब स्टूडियो में सेट लगाया गया और पहला शेड्यूल बिना किसी परेशानी के पूरा हो गया। फिल्म की शूटिंग आगे बढ़ती रही, लेकिन कुछ रील बनने के बाद खन्ना ने अपने स्टारडम का असर जे. ओमप्रकाश को दिखा ही दिया। एक सीन के अनुसार, राजेश खन्ना को अपने बेडरूम में प्रवेश करना था और उनकी आंखों के दृष्टिकोण से बिस्तर पर बिखरी हुई चादर और पी हुई सिगरेट के टुकड़े दिखाने थे। यहीं से यह बात स्थापित होनी थी कि हीरो को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक होता है। सीन फिल्माने से पहले खन्ना को निर्देश दिया गया कि एक्शन सुनते ही दरवाजे से अंदर आएं। वैâमरा दरवाजे पर ही लगाया गया था, लेकिन किसी कारणवश शूटिंग तैयार नहीं हो पा रही थी और खन्ना दरवाजे के पीछे खड़े होकर निर्देशक के आदेश का इंतज़ार करते रहे। २०-२५ मिनट तक खड़े रहने के बाद उनका अहंकार आहत हुआ और वे गुस्से में पीछे के रास्ते से निकलकर अपनी कार में बैठकर चले गए। जब निर्देशक ने एक्शन कहा, तो खन्ना की एंट्री ही नहीं हुई। तब पता चला कि वे जा चुके हैं। किसी तरह अगले दिन ओमप्रकाश ने खन्ना को मनाकर वापस बुलाया और फिल्म आप की कसम मात्र १० महीनों में पूरी कर ली गई, लेकिन ओमप्रकाश की हिम्मत की दाद देनी होगी। उन्होंने राजेश और संजीव को लेकर एक और फिल्म आक्रमण बनाई। वहीं, उन्होंने संजीव को लेकर आंधी (निर्देशन गुलजार) और अपनापन भी बनार्इं, जो यादगार फिल्मों में गिनी जाती हैं।
