संजय राऊत
`प्रधानमंत्री मोदी १२ साल से सत्ता से चिपके बैठे हैं। १२ साल में उन्होंने १,२०० तरह के कारनामे किए हैं। उधर इंग्लैंड में नैतिकता के मुद्दे पर १० साल में ६ प्रधानमंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। सत्ता टिकाने के लिए सांसदों को खरीदने का प्रयास इनमें से किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं किया।’
कलियुग ही झूठा है। अगर ऐसा न होता तो जनक राजा यानी अमित शाह ने ‘मशाल’ चिह्न पर चुने गए ६ सांसदों को कमलाबाई की गोद में दिए न होते। इसके लिए ५०-५० करोड़ रुपए दिए गए, ये भी छिपा नहीं है। शिवसेना के ६ सांसद फूटे तो सिर्फ पैसों के लिए। धाराशिव के ओम निंबालकर को पैसे की बहुत जरूरत रही होगी। इसलिए विकास निधि का बहाना बनाकर वे भाग गए। बाकी सांसदों ने भी निधि का ही रोना रोया। इस पर उमरगा के १०० किसानों ने एकजुट होकर निंबालकर को प्रस्ताव दिया, ‘‘ऐसे भागम-भाग मत करो। हम १०० किसान अपनी किडनी बेचकर आपके लिए ८०-८५ करोड़ रुपए इकट्ठा कर देंगे, पर शिवसेना छोड़कर मतदाताओं से विश्वासघात मत करो।’’ ये हुई उमरगा की बात।
शिर्डी की जनता ने तो वहां के भागे हुए सांसद भाऊ वाकचौरे की पैसों की कमी पूरी करने के लिए साईबाबा के दर पर भीख मांगने का अभियान शुरू कर दिया है। ये लहर अब गद्दार सांसदों के सभी निर्वाचन संघ में पहुंचेगी और ५० करोड़ में बिकने वालों का बाहर घूमना मुश्किल हो जाएगा।
निधि किसके लिए?
विकास निधि चाहिए और वो सभी विधायकों को चाहिए, पर मुख्यमंत्री फडणवीस-उपमुख्यमंत्री शिंदे विपक्षी विधायकों को निधि देने को तैयार नहीं हैं। ओम निंबालकर ने दल बदल किया और उपमुख्यमंत्री शिंदे ने तुरंत उन्हें १८ करोड़ की निधि मंजूर कर दी। ये भ्रष्टाचार है। अगर आप विपक्ष में बैठेंगे और सरकार से सवाल पूछेंगे तो आपके निर्वाचन संघ का विकास नहीं होगा। देश की नई लोकतांत्रिक व्यवस्था का ये भयानक रूप है। कई राजनीतिक दल (Multi party) वाले संसदीय लोकतंत्र की ये हत्या है। विकास निधि किसी पार्टी या व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती। जनता के टैक्स के पैसे से ये निधि बनती है। ये टैक्स विपक्ष को वोट देने वाले लोग भी देते हैं, पर उन्हें विकास निधि से वंचित रखा जाता है। न्यायालय, चुनाव आयोग, कैग जैसी संवैधानिक संस्थाएं इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। जनता का ये पैसा सीधे-सीधे विधायक-सांसद तोड़ने के लिए, उन्हें खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
संविधान का दसवां अनुच्छेद
भाऊ वाकचौरे, नागेश आष्टीकर, ओम निंबालकर, संजय देशमुख, संजय दीना पाटील, संजय जाधव फूट गए। संविधान की दसवीं अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून की व्याख्या है। उसमें दल-फूट और स्वतंत्र गुट को मान्यता नहीं है। फिर भी शिंदे का टूटा हुआ गुट आज सत्ता में मजे कर रहा है। अब ६ सांसद टूट गए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को जाकर बताया कि हम अलग गुट हैं। तृणमूल कांग्रेस से ६० विधायक और २२ सांसद टूटे। उन्होंने भी अलग गुट बना लिया और तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से श्रीमती ममता बनर्जी को ही हटा दिया। वो किस नियम-कानून के तहत? भारतीय संविधान में जिस प्रक्रिया का प्रावधान ही नहीं है, उसका संरक्षण लेकर अमित शाह और उनके लोग दल-बदलुओं और चोरों को संरक्षण दे रहे हैं। राज्यसभा चुनाव खुले तरीके से होते हैं। ओडिशा में बीजू जनता दल और कांग्रेस के कुछ विधायकों ने खुलेआम पार्टी के आदेश को दरकिनार कर भाजपा को वोट दिया। दोनों दलों के प्रतोद ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष के पास इन विधायकों की बर्खास्तगी की याचिका लेकर गए, पर विधानसभा अध्यक्ष ने उसे खारिज कर दिया। यानी दल-बदल विरोधी कानून को भाजपा ने नाली में फेंक दिया। ममता बनर्जी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे के जीते-जी उनके दल चोरों के हाथ सौंप दिए गए। देश में कोई कानून, नियम बचा ही नहीं। इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाकर आजादी की हत्या की, ऐसा अब आगे से भाजपा न बोले। वो तो रोज लोकतंत्र और भारतीय संविधान की हत्या कर रहे हैं। दल-बदल विरोधी कानून की जान रहे ‘दसवीं अनुसूची’ को तो उन्होंने तिल-तिल कर खत्म कर दिया।
चार्टर्ड विमान यात्रा
टूटे हुए और बिके हुए सभी सांसद अब ‘चार्टर्ड’ विमान से घूमते हैं। निर्लज्जतापूर्वक इस रईसी सफर की तस्वीरें वो प्रकाशित करते हैं और मतदाताओं के जख्म पर नमक छिड़कते हैं। संजय जाधव परभणी के सांसद हैं। वो खुद को वारकरी मानते हैं। इतने कट्टर शाकाहारी कि जिस होटल या घर में मांसाहार बनता है, बंडू जाधव वहां पानी तक नहीं पीते थे, ये मैंने खुद देखा है। पर टूटने के बाद उनका ‘चार्टर्ड’ सफर शुरू हो गया। उस विमान की आलीशान डाइनिंग टेबल पर बैठकर यही जाधव ग्लास से रहस्यमय रंगीन पानी पी रहे हैं और शायद मुंह में काजू-बादाम डाल रहे हैं। (वीडियो उपलब्ध है।) विमान में ‘वेज-नॉनवेज’ एक ही जगह रखा जाता है। पचास करोड़ में उनकी दुनिया ही बदल गई। नए-कोरे बंडू जाधव लोगों ने देखे। चार्टर्ड विमान उनकी सेवा में आ गए। ये करोड़ों का खर्च कौन कर रहा है?
मंदिर लूट का पैसा
मुंबई का एक भाजपा कार्यकर्ता मिला। उसने कहा, हम सालों से काम कर रहे हैं, पर आज भी दरियां उठा रहे हैं। राजनीति में बेईमानों को महत्व मिल रहा है और करोड़ों का पैसा भी उन्हें दिया जा रहा है। किस हिंदुत्व को लेकर बैठे हो? अयोध्या के राम मंदिर में लूटा हुआ, चुराया हुआ पैसा राजनीति में इस्तेमाल हो रहा है और उसी मंदिर के पैसे से विधायक-सांसद खरीदे जा रहे हैं। राम का राज आज हराम का राज बन गया है। नरेंद्र मोदी १२ साल से प्रधानमंत्री की कुर्सी से चिपके बैठे हैं। इस दौरान उन्होंने बारह सौ कारनामे किए। इंग्लैंड में दस साल में छह प्रधानमंत्रियों को नैतिकता और झूठ के मुद्दों पर इस्तीफा देना पड़ा। अब वर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी इस्तीफा दे दिया। दो साल पहले उनके नेतृत्व वाली लेबर पार्टी ने ६५० में से ४०३ सीटें जीतकर बहुमत का रिकॉर्ड बनाया था, पर स्टार्मर ने जनता से किए वादे पूरे नहीं किए इसलिए लेबर पार्टी के ही सौ से ज्यादा सांसदों ने स्टार्मर के खिलाफ बगावत कर दी। स्टार्मर द्वारा की गई कुछ नियुक्तियों और नीतियों के कारण उनकी ही पार्टी में असंतोष बढ़ गया। स्टार्मर ने सत्ता टिकाने के लिए भारत की तरह सांसदों को नहीं खरीदा। विरोध करने वालों के पीछे जांच एजेंसियां नहीं लगाईं, पैसे का इस्तेमाल नहीं किया, पैसा कम पड़ा तो चर्च के खजाने पर डाका नहीं डाला। यही अंग्रेजों का संसदीय लोकतंत्र है। इसी लोकतंत्र की विरासत छोड़कर अंग्रेज भारत से गए। हमने उस लोकतंत्र और संसद का ये क्या हाल कर दिया है? बेहद बकवास, भ्रष्ट, क्रूर शासन व्यवस्था को हम ‘रामराज्य’ कह रहे हैं, पर इसी व्यवस्था ने भारतीय संविधान का ‘शिवधनुष’ तोड़ दिया।
टूटे हुए शिवधनुष का अब क्या करें?
