मुख्यपृष्ठग्लैमरमुझे निराशावादी लोग नहीं पसंद!- अक्षय कुमार

मुझे निराशावादी लोग नहीं पसंद!- अक्षय कुमार

-दिल्ली के रहने वाले अक्षय कुमार का ३५ साल का फिल्मी सफर संघर्ष से शुरू हुआ। बैंकॉक में शेफ बनने का सपना छोड़कर दोस्तों की सलाह पर वे मुंबई पहुंचे। यहां उन्होंने फोटोग्राफर जयेश सेठ के स्टूडियो में करीब १८ महीने तक सहायक के रूप में काम किया, जहां चाय-कॉफी बनाने से लेकर के कैमरा संभालने तक हर जिम्मेदारी निभाई। जयेश सेठ ने उनका मुफ्त फोटोशूट कराया, जिसकी तस्वीरें निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती तक पहुंचीं। हालांकि, पहली रिलीज फिल्म ‘सौगंध’ (१९९१) रही। शुरुआती ९ फिल्में फ्लॉप रहीं, लेकिन ‘खिलाड़ी’ की सफलता ने उन्हें स्टारडम और ‘खिलाड़ी कुमार’ की पहचान दिला दी। आज देश के शीर्ष सितारे बनने के बावजूद, उन्होंने अपनी फिटनेस, अनुशासन, समय की पाबंदी और हर फिल्म ‘बिफोर टाइम’ को पूरा करने के रिकॉर्ड को बरकरार रखा है। अभिनय के अलावा, अक्षय की इन खूबियों के लिए भी प्रशंसा की जाती है। फिरोज नाडियाडवाला द्वारा निर्मित और अहमद खान द्वारा निर्देशित उनकी फिल्म ‘वेलकम टू जंगल’ २६ जून को रिलीज हो गई है। पेश हैं, अक्षय कुमार से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

अक्षय, वेलकम फ्रेंचाइज के तीसरे भाग – ‘वेलकम टू जंगल’ के बारे में आप क्या कहेंगे? आप वेलकम अगेन (भाग २) में नहीं थे, इसका क्या कारण है?
मैं ‘वेलकम’ का हिस्सा नहीं था, इसलिए उस फिल्म पर क्या कहूं। ‘वेलकम बैक’ के समय मेरी डेट्स उपलब्ध नहीं थीं। अब ‘वेलकम टू जंगल’ में ३४ कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जो अपने आप में अनोखा अनुभव रहा। इतनी बड़ी स्टारकास्ट के साथ कॉमेडी करना आसान नहीं है। फिल्म में मैं भोजपुरी बोलने वाले एक फ्लॉप अभिनेता का किरदार निभा रहा हूं। इस भूमिका के लिए मुझे भोजपुरी का अभ्यास करना पड़ा। राजपाल यादव और जॉनी लीवर जैसे शानदार कॉमेडियन भी फिल्म की बड़ी ताकत हैं।’
आप हर तरह की भूमिकाएं निभाते हैं, तो आपकी पसंदीदा शैली कौन सी है?
पिछले ३४-३५ सालों में मैंने प्रेमी, एक्शन, कॉमेडी, देशभक्ति, स्वतंत्रता सेनानी, पारिवारिक और नकारात्मक जैसे हर तरह के किरदार निभाए हैं। शुरुआत में मुझे सिर्फ एक्शन रोल ही मिलते थे, लेकिन बाद में मैंने खुद को अलग-अलग भूमिकाओं में आजमाने का पैâसला किया। कॉमेडी आसान नहीं होती, फिर भी दर्शकों ने मुझे इस रूप में खूब प्यार दिया। जॉनी लीवर, फरीदा जलाल और राजपाल यादव जैसे कलाकारों से मैंने बहुत कुछ सीखा है। ‘वेलकम टू जंगल’ में मैं संघर्षरत भोजपुरी अभिनेता बना हूं, इसलिए इस भाषा की भी तैयारी करनी पड़ी। मैं हंसमुख इंसान हूं और काम के साथ जिंदगी के हर पल का आनंद लेना पसंद करता हूं।
आपके करियर को ३५ साल हो चुके हैं। क्या इस दौर में मल्टी-स्टारर फिल्में करना आपके लिए सही फैसला है?
आज किसी को नहीं पता कि कौन-सी फिल्म दर्शकों को पसंद आएगी। ‘वेलकम’ के पहले दोनों भाग हिट रहे, इसलिए मुझे भरोसा है कि ‘वेलकम टू जंगल’ भी दर्शकों का मनोरंजन करेगी। यह एक मसाला मल्टी-स्टारर फिल्म है और मुझे मल्टी-स्टारर व सोलो, दोनों तरह की फिल्में करना पसंद है। दर्शक भी एक साथ कई सितारों को देखना पसंद करते हैं। इतने कलाकारों के साथ काम करने के लिए आत्मविश्वास जरूरी होता है, जो मुझमें है। मेरा मानना है कि सबसे जरूरी फिल्म का सफल होना है, क्योंकि इससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री आगे बढ़ती है।
क्या आप पिछले ३५ वर्षों में हुई अपनी प्रगति से संतुष्ट हैं? कभी बोर नहीं हुए लगातार काम करते हुए? कभी रिटायर होने का ख्याल नहीं मन में आया?
मैंने शून्य से शुरुआत की थी। मुंबई में मेरा कोई अपना नहीं था। एक वरिष्ठ फोटोग्राफर के यहां बिना वेतन सहायक के रूप में काम किया। वहीं से फोटोशूट हुआ और फिल्मों में पहला मौका मिला। शुरुआती कई फिल्में फ्लॉप रहीं, लेकिन ‘खिलाड़ी’ की सफलता ने मेरी जिंदगी बदल दी। मैंने कभी हार नहीं मानी। मेहनत, किस्मत, निर्माताओं की जरूरतों को समझने की आदत और लगातार सीखते रहने की सोच ने मुझे ३५ साल तक टिकाए रखा। आज भी रिटायरमेंट का विचार नहीं आता, क्योंकि जब सुबह उठने का मन नहीं करता, तब याद आता है कि सेट पर २००-३०० लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं। निर्माता, निर्देशक, सह-कलाकार और प्रोडक्शन स्टाफ की रोजी-रोटी इस काम से जुड़ी है, यही जिम्मेदारी मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

 

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