मुख्यपृष्ठस्तंभमंत्री के खीरे खा गए सरकारी खजाना!

मंत्री के खीरे खा गए सरकारी खजाना!

-अपने ही मंत्रालय की योजना से खेत को मिली ९९ लाख रुपए की सब्सिडी, हितों के टकराव पर उठे सवाल

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के खीरे के फार्म को करीब ९९ लाख रुपए की सरकारी सब्सिडी मिलने के बाद राजनीतिक और नैतिक सवाल खड़े हो गए हैं। करीब दो करोड़ रुपए की इस परियोजना को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत मंजूरी दी गई, जो केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन काम करता है।
मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि चौधरी उसी मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं, जिसके अंतर्गत आने वाली संस्था ने उनके फार्म को इतनी बड़ी आर्थिक सहायता दी। भले ही परियोजना की मंजूरी देने वाली समिति में मंत्री सीधे शामिल नहीं रहे हों, लेकिन पद और प्रभाव के कारण हितों के टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य छोटे और जरूरतमंद किसानों को आधुनिक खेती के लिए सहायता देना है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या करोड़ों की परियोजना लगाने में सक्षम एक केंद्रीय मंत्री को लगभग एक करोड़ रुपए की सब्सिडी देना उचित है? क्या आम किसान को भी इतनी तेजी और आसानी से सरकारी सहायता मिलती है?
इस पूरे प्रकरण ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता, लाभार्थियों के चयन और सत्ता में बैठे लोगों को मिलने वाले विशेष लाभ पर गंभीर बहस छेड़ दी है। विपक्ष इस मामले को सरकारी खजाने के दुरुपयोग और पद के प्रभाव से जोड़कर देख सकता है।

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