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न दबाव में आता हूं, न किसी पर दबाव डालता हूं

-एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे बोले, कारोबार बंद कराना मकसद नहीं, नागरिकों की सेहत बचाना जिम्मेदारी

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में सिंथेटिक दूध, नकली पनीर, मिलावटी खाद्य तेल और गंदगी के बीच परोसे जा रहे भोजन के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई ने बड़े-बड़े कारोबारी प्रतिष्ठानों की नींद उड़ा दी है। इस अभियान का चेहरा बने एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने साफ कहा है कि वे न किसी दबाव में आते हैं और न अधिकारियों पर गलत दबाव डालते हैं। उनकी प्राथमिकता विभाग की कार्य संस्कृति बदलना और कानून को बिना भेदभाव लागू करना है।
मुंढे की अगुवाई में एफडीए ने पिछले कुछ महीनों में पांच सितारा प्रतिष्ठानों से लेकर छोटे ढाबों तक निरीक्षण तेज किए हैं। मुंबई में कई बड़े क्लब और रेस्तरां स्वच्छता तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन में कार्रवाई की जद में आए हैं। कुछ जगहों पर मक्खियां और कॉकरोच मिले, कहीं खाद्य सामग्री के भंडारण में गंभीर खामियां पाई गर्इं तो कहीं नकली या एनालॉग चीज के इस्तेमाल का मामला सामने आया।
बड़े नाम भी जांच से बाहर नहीं
इस कार्रवाई की खासियत यह है कि जांच केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रखी गई। एफडीए ने बड़े ब्रांड, रेस्तरां, क्लब और सेलिब्रिटी विज्ञापनों तक पर कार्रवाई शुरू की है। शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को सरोगेट विज्ञापन के मामले में नोटिस जारी करना इसी नीति का हिस्सा बताया गया है। मुंढे का कहना है कि कानून सबके लिए समान है और किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या बड़े कारोबारी को अलग छूट नहीं दी जा सकती। महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर को होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल करने पर एक वर्ष के लिए रोक लगाई गई है। नियम तोड़ने पर स्टॉक जब्ती, नष्ट करने और दंडात्मक कार्रवाई की व्यवस्था है।
एक अफसर नहीं, व्यवस्था बदले
मुंढे ने इस पूरे अभियान के बीच एक बड़ा प्रशासनिक सवाल भी खड़ा किया है। यदि खाद्य सुरक्षा केवल किसी एक सख्त अधिकारी की मौजूदगी पर निर्भर रहे तो अधिकारी के तबादले के साथ व्यवस्था फिर पुराने ढर्रे पर लौट सकती है। इसलिए उनका जोर विभाग की कार्य संस्कृति बदलने, निरीक्षण को नियमित बनाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर है।
खुला तेल भी निशाने पर
एफडीए ने मिलावट और असुरक्षित पैकिंग की आशंका को देखते हुए नागरिकों से खुला खाद्य तेल न खरीदने की अपील की है। इसके बाद महाराष्ट्र में खुले तेल की बिक्री पर सख्त रोक लगाने के निर्देश भी जारी किए गए। मुंढे का तर्क है कि एफडीए का उद्देश्य उद्योग या व्यापार को बाधित करना नहीं है। उनका कहना है कि कारोबारी नियमों का पालन करें, सुरक्षित खाद्य सामग्री बेचें और नागरिकों के स्वास्थ्य से समझौता न करें तो प्रशासन को कार्रवाई की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

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