मुख्यपृष्ठटॉप समाचारसरकार की नाक के नीचे २,१३४ करोड़ का कथित घोटाला!

सरकार की नाक के नीचे २,१३४ करोड़ का कथित घोटाला!

-गृह विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
-१६ कंपनियों का जाल, हजारों लोगों के पैसे फंसने की आशंका

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य में अपराध चरम पर है। आर्थिक मामलों में आए दिन बड़े घोटाले सामने आ रहे हैं। अब महायुति सरकार की नाक के नीचे ही २,१३४ करोड़ रुपए के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। लातूर में १६ कंपनियों की मिलीभगत से हजारों लोगों को ठगे जाने का आरोप सामने आया है।
आयकर विभाग पिछले तीन दिनों से मामले की जांच में जुटा था। जांच के बाद कई तथ्य सामने आए हैं। श्याम शिवप्रसाद कालानी सहित १६ कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि २,१३४ करोड़ ७९ लाख ४३ हजार ७३० रुपए का कथित वित्तीय फर्जीवाड़ा किया गया। विदेशी धन भेजने से संबंधित कथित फर्जी और बनावटी प्रमाणपत्र तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के जरिए आर्थिक लाभ के लिए धन विदेश भेजने में मदद किए जाने का भी आरोप है।

हजारों लोगों के पैसे फंसने की आशंका
इस कथित घोटाले का असर केवल सरकारी खजाने या कंपनियों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। पूरे मामले की जांच आगे बढ़ने पर कई हजार लोगों के पैसे भी फंसने या डूबने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, कितने लोगों की रकम प्रभावित हुई है और वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना है, इसका स्पष्ट आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इतनी बड़ी रकम के कथित लेन-देन के बावजूद संबंधित तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी। महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी गृह विभाग के पास है। अब सवाल उठने लगा है कि जब हजारों करोड़ रुपए का कथित वित्तीय खेल चल रहा था, तब पुलिस और गृह विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर क्या कर रही थी? जानकारी के मुताबिक, मोंढा इलाके में आयकर विभाग की टीम तीन दिनों से जांच कर रही थी। जांच के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर के उप आयकर विभाग के निदेशक दीपक कुमार की शिकायत पर उदगीर शहर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।

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