मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव : अंधभक्तों ने ही फोड़ दिया मोदीजी का डंका!

दिल्ली लाइव : अंधभक्तों ने ही फोड़ दिया मोदीजी का डंका!

-अरुण कुमार गुप्ता

अंधभक्त बेचारे हमेशा मोदी जी का डंका बजाने के फिराक में रहते हैं। उनको ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान डंका बजाने का मौका भी मिल गया, लेकिन इन भक्तों ने ऐसा डंका बचाया कि डंका ही फूट गया। हम बात करते हैं उस फोटो की जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फोटो को किसी सड़क छाप ने नहीं, अंधभक्त ने नहीं बल्कि सांसद मनोज तिवारी और भाजपा प्रवक्ता साजिया इल्मी ने वायरल किया है। फोटो में दिखाया गया है कि ब्रिक्स सम्मेलन में सभी सदस्य देशों के राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन फोटो के बीच में कुछ ऐसे लोगों का भी फोटो डाल दिया गया है जो या तो आए ही नहीं या फिर जिनकी मौत हो गई है। फोटो में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को दिखाया गया है, जबकि इब्राहिम रईसी की मौत २ साल पहले हो चुकी है। इसके अलावा ब्राजील के राष्ट्रपति लूला को भी दिखाया गया है जो कि आए ही नहीं थे। यही नहीं, तुर्की के राष्ट्रपति को भी फोटो में दिखाया गया है जो ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हुए ही नहीं। ऐसी तस्वीरें इसलिए पेश की गर्र्इं ताकि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डंका बजाया जा सके, लेकिन हो गया उल्टा। अब आप क्या कहेंगे इन अंधभक्तों को। यह अंधभक्त मोदी जी का दुनिया में डंका बजाने की बजाय डंका ही फोड़ रहे हैं।

बैंक, एनपीसीआई, आरबीआई सभी प्रॉफिट में तो नुकसान किसका हो रहा था
यूपीआई पर चार्ज के पीछे अमेरिका का दबाव!

पिछले दिनों यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगाने की घोषणा की गई, लेकिन सवाल यह है कि जिस यूपीआई को डिजिटल बढ़ावा के नाम पर करीब ७ साल तक फ्री रखा गया। अब उस पर चार्ज लगाने की नौबत कहां से आ गई। आपको बता दें कि यूपीआई पेमेंट के लिए दो बड़ी अमेरिकी कंपनियों का उपयोग किया जाता है, जिसमें एक जीपे जिसका मालिक खुद गूगल है और दूसरा फोनपे जिसका मालिक वॉलमार्ट है। भारत में सालभर में करीब २,००० रुपए से ऊपर के १७ लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन यूपीआई के माध्यम से होता है। इसमें ४६ प्रतिशत ट्रांजैक्शन फोनपे से और ३३ प्रतिशत ट्रांजैक्शन गूगलपे से किए जाते हैं यानी कुल १७ लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन का करीब ८० प्रतिशत इन दो अमेरिकी कंपनियों के माध्यम से किए जाते हैं। अब १७ लाख करोड़ पर जो चार्ज हमें पे करना होगा उसका ८० प्रतिशत इन दो अमेरिकी कंपनियों को जाएगा। अभी तक भारत में जो यूपीआई फ्री था। इससे अमेरिका को काफी दिक्कत थी और वह कई बार इसका विरोध भी कर चुका था। क्योंकि इससे गूगल पे, फोनपे के साथ-साथ वीजा और मास्टर कार्ड की कमाई भी प्रभावित हो रही थी। अमेरिकन कंपनी वीजा और मास्टर कार्ड पर चार्ज लगता था इसलिए देश के लोग रूपे कार्ड का इस्तेमाल करने लगे या यूपीआई का उपयोग करने लगे, जिससे अमेरिका की कमाई और प्रभावित हो रही थी। आपको बता दें कि भारत में जो यूपीआई पर चार्ज लगाने का ऑर्डर पास किया गया है वह एनपीसीआई यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को आरबीआई ने बनाया था और इसके मालिक प्राइवेट, सरकारी और विदेशी बैंक हैं। एनपीसीआई ने यूपीआई पर चार्ज लगाने से पहले किसी भी उपभोक्ता संगठन से चर्चा नहीं की। एनपीसीआई का कहना है कि हमें यूपीआई चलाने में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि देश के बैंक २०२६ में ४ लाख करोड़ से ज्यादा के प्रॉफिट कमाए हैं। आरबीआई ने खुद सरकार को करीब ३ लाख करोड़ का सरप्लस दिया है और खुद एनपीसीआई २००० करोड़ का प्रॉफिट कमाया है। जब बैंक, एनपीसीआई, आरबीआई सभी प्रॉफिट में हैं तो आखिर नुकसान किसका हो रहा था। कुछ समय पहले मोदी सरकार कह रही थी कि यूपीआई पर कोई चार्ज नहीं लगाएंगे। हम डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देते रहेंगे, लेकिन यहां सरकार की प्रमुखता जनता को जनता को लूटने की है। मोदी सरकार की जुबान की कोई गारंटी नहीं है। खुलेआम झूठ बोलती है। कुल मिलाकर इस सरकार ने देश के लोगों को अमेरिका का गुलाम बना दिया है।

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