-मुंबई, ठाणे, पुणे, नई मुंबई जैसे शहरों में बेची जा रही हैं दवाएं
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र के दवा बाजार में एक बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य में ३,००० से अधिक दवा मार्वेâटिंग कंपनियां एक ऐसा ‘शैडो नेटवर्क’ चला रही हैं, जो सीधे जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। जांच में पता चला है कि ये कंपनियां अन्य राज्यों में थर्ड-पार्टी मैन्युपैâक्चरिंग से सस्ते दाम पर कफ सिरप और अन्य दवाएं बनवाती हैं, उन पर अपना ब्रांड नाम चस्पां करती हैं और फिर मुंबई, ठाणे, पुणे, नई मुंबई जैसे शहरी इलाकों में बेच देती हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इन कंपनियों की दवाओं पर किसी प्रकार का गुणवत्ता नियंत्रण नहीं है। वे बाहर से बनी तैयार दवाओं को सीधे पैक करके बेच देती हैं, जिससे नकली, अव्यवस्थित और घटिया सामग्री से बनी दवाएं बाजार में आसानी से पहुंच जाती हैं। यही कारण है कि हाल में कफ सिरप और अन्य दवाओं के मामले में लगातार वृद्धि देखी गई है।
स्लम इलाके बने ‘ऑपरेशन हब’
ऑल फूड एंड ड्रग लाइसेंस होल्डर फाउंडेशन के अध्यक्ष अभय पांडेय ने कहा कि इस नेटवर्क की सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि इन कंपनियों के मुख्यालय मुंबई, ठाणे और पालघर जिले के स्लम इलाकों में बने हुए हैं। घनी आबादीवाले और निगरानी से दूर इलाकों का इस्तेमाल इन कंपनियों ने अपने अवैध कारोबार के ठिकाने के रूप में किया हुआ है। यहां रजिस्टर्ड ऑफिस होने के बावजूद इनकी कोई वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट मौजूद नहीं है।
ड्रग इंस्पेक्टर्स की कमी बनी वरदान
राज्य में ड्रग इंस्पेक्टरों के १५५ पद खाली होने के कारण, यह नेटवर्क बिना किसी डर के फल-फूल रहा है। मुश्किल से मौजूद ४५ इंस्पेक्टर इस विशाल और संगठित नेटवर्क पर नजर रखने में पूरी तरह से असमर्थ हैं। अभय पांडेय ने कहा कि यह स्थिति महाराष्ट्र के नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल एक विशेष अभियान चलाकर कंपनियों की जांच करे और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
