प्रेम यादव / भायंदर
मीरा-भायंदर का राशनिंग विभाग भ्रष्टाचार की दलदल में फंसा हुआ है। चौंकानेवाली बात यह है कि इस विभाग में एक प्राइवेट व्यक्ति खुलेआम सरकारी अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर फाइलें चेक करता है, साइन करता है और खुद को अधिकारी बताकर जनता से वसूली करता है।
यह व्यक्ति किसी भी सरकारी पद पर नहीं है, लेकिन फिर भी राशनिंग कार्यालय में ऐसा काम करता है, मानो पूरा विभाग उसी के इशारे पर चलता हो।
भ्रष्टाचार की जड़ में ‘दलाली तंत्र’
सूत्रों के अनुसार, नितिन पवार को विभाग के ही कुछ अधिकारी संरक्षण दे रहे हैं। शिधावाटप अधिकारी और एक अन्य अधिकारी का नाम इसमें सामने आया है। बताया जाता है कि यही अधिकारी इस अवैध गतिविधि पर आंखें मूंदे बैठे हैं, बल्कि कई बार मदद भी करते हैं। सरकारी दस्तावेज और रजिस्टर इसी प्राइवेट आदमी के हाथों में हैं। राशन कार्ड के लिए लोगों से घर जाकर आवेदन लेता है। सत्यापन के नाम पर पैसे की मांग करता है। दुकानदारों से वसूली कर अधिकारियों तक पैसा पहुंचाता है। यह सब खुलेआम सरकारी कार्यालय में हो रहा है, जहां आम नागरिक को बिना दलाल के काम करवाना लगभग असंभव है।
दलालमुक्त का दावा, हवा में गया वादा
भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने कुछ महीने पहले दलालमुक्त राशनिंग विभाग की मुहिम चलाई थी। वैंâप लगाकर कार्ड बनवाने की पहल की गई और जनता के सामने दावा किया गया कि विभाग अब ‘दलाल-मुक्त’ है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आज भी राशन कार्यालय के बाहर दलालों की भीड़ लगी रहती है। कार्ड बनवाना हो, नाम जोड़ना या हटाना हो बिना दलाल के कोई काम नहीं होता।
वीडियो वायरल, लेकिन कार्रवाई नहीं
हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें नितिन पवार ‘प्राइवेट अधिकारी’ सरकारी कुर्सी पर बैठकर काम करता हुआ दिखा। वीडियो सामने आने के बाद कुछ दिनों के लिए उसे कार्यालय से बाहर कर दिया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद मामला ठंडा पड़ते ही उसे फिर से अंदर आने की अनुमति दे दी गई। अब वह दोबारा उसी कुर्सी पर बैठा है और फिर से वही खेल शुरू हो गया है।
