सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने सीधे नाम लेकर महायुति सरकार के भाजपा नेता और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील पर निशाना साधा। एक ओबीसी समाज के बड़े महासम्मेलन में वे काफी आक्रामक नजर आए, जिसके बाद से राजनीतिक हलकों में और महायुति के मंत्रिमंडल के अंदर की बढ़ती खटपट बाहर आने लगी है। इसी पर अब शिवसेना के नेता और पूर्व विपक्ष नेता अंबादास दानवे ने भुजबल को सावधान करते हुए कहा है कि अगर उन्होंने ऐसे आरोप लगाए तो उनकी जमानत रद्द हो जाएगी।
दानवे ने भुजबल को कहा कि अगर उन्हें मंत्रिमंडल के पैâसले का विरोध है तो फिर मंत्रिमंडल में बने क्यों हुए हैं? अगर आप संतुष्ट नहीं हैं तो इस्तीफा दे दीजिए।
अंबादास दानवे ने कहा कि महाराष्ट्र में जातीय विवाद नहीं होना चाहिए। हमारी समृद्ध परंपरा है। दोनों पक्षों से उग्र बयान आ सकते हैं, लेकिन अगर आपको मंत्रिमंडल के निर्णयों से विरोध है तो फिर आप उसमें क्यों बने हुए हैं? अगर राधाकृष्ण विखे पाटील कटु स्वभाव के हैं, तो फिर आप उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर क्यों बैठे हैं? अगर आपको किसी मंत्री पर गुस्सा है तो फिर उसी मंत्रिमंडल में क्यों रह रहे हैं? दानवे ने भुजबल पर तंज कसते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में रहकर उसी के निर्णयों का विरोध करना ‘दोहरी नीति’ है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व करने वाले कुछ लोगों का असली चेहरा अब सामने आया है।
‘ओबीसी’ मुद्दे पर मंत्री हुए थे आक्रामक
