मुख्यपृष्ठस्तंभपुस्तक समीक्षा : प्रेमचंद की याद दिलाती कहानियां: सोने मा सोहागा

पुस्तक समीक्षा : प्रेमचंद की याद दिलाती कहानियां: सोने मा सोहागा

राजेश विक्रांत

देश के जाने माने पर्यावरण प्रहरी डॉ अर्जुन पांडेय का अवधी कहानी संग्रह ‘सोने मा सोहागा’ नैतिकता में भरोसा सुदृढ करता है क्योंकि संग्रह की सभी 21 कहानियां- राजा रैवतक अउर रेवती, गांव सुराज, सोने मा सोहागा, धरती कै कोख, पचबिरवा, पुन्नवासी, सच्ची दोस्ती, दुखी इंसान, हेराइ गई बरखा, सच्ची मानवता, मजूरी, निमित्त जिंदगी, नामी मरै नाव का, सूझबूझ, करतब, सुख कै चाहत, मंत्र कै ताकत, जादुई मोती, बिरवा पूत, बारह लखन्दर एवं तपस्वी सिंह वैद्य जीवन व समाज में अच्छाई की प्रेरक हैं। इनमें प्रेम का शाश्वत रूप है, पर्यावरण, कृषि व संस्कृति के संरक्षण का संदेश है। प्राकृतिक सौंदर्य है, लोकमंगल की भावना है तथा कहानियों में आशावादी दृष्टिकोण भी है।

अवधी साहित्य संस्थान अमेठी उ. प्र. के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडेय मूल रूप से भूगोलवेत्ता एवं पर्यावरणविद् हैं। सन 2020 में इनके मन में अपनी बोली-बानी में रुचि जगी और इन्होंने अवधी साहित्य संस्थान की स्थापना की। अवधी के प्रचार-प्रसार, सम्वर्द्धन-प्रकाशन के लिए अनेक आयोजन किए। मासिक गोष्ठियां तथा वार्षिक अवधी सम्मेलन के जरिए विशेष कर अवधी भाषी जनपदों में कवियों एवं साहित्यकारों का समागम करवाया, जिसमें कनाडा, नॉर्वे एवं नेपाल तक के साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया। उनका पहला अवधी कहानी संग्रह ‘जब जागै तबै सबेरा’ 2021 में अवध भारती संस्थान, बाराबंकी से प्रकाशित हुआ। इस कहानी संग्रह को साहित्य जगत में प्रशंसा और ख्याति मिली। इसी श्रृंखला में अब आया है उनका दूसरा कहानी संग्रह ‘सोने मा सोहागा’।

संग्रह की पहली कहानी ‘राजा रेवतक अउर रेवती’ मिथक आधारित है। ‘गांव सुराज’ में ग्राम स्वराज का संदेश है यानी कि सुराज के जरिए, स्वशासन के माध्यम से आपसी भाईचारा और मेल मिलाप द्वारा गांव के सभी मामले निपटाए जा सकते हैं। शीर्षक कहानी ‘सोने मा सोहागा’ का संदेश है कि समझदारी परिवार को बचा सकती है। जिस परिवार में कलावती जैसी महिलाएं सक्रिय हो जाए और पंचायतें अपना लोक धर्म पूरी निष्पक्षता से पालन करें तो सच्चे संबंध फिर से स्थापित किए जा सकते हैं। ‘धरती कै कोख’ पृथ्वी व मां की समानता प्रतिपादित करती है। जबकि ‘पंचबिरवा’ और ‘हेराइ गई बरखा’ प्रकृति व पर्यावरण में सामंजस्य का झंडा बुलंद करती है। ‘सच्ची मानवता’ मानव धर्म को ही सच्चा धर्म मानती है तो ‘निमित्त जिंदगी’ जीवन में नेकी व परोपकार का रास्ता दिखाती है। इसी तरह से अन्य कहानियां पुन्नवासी, सच्ची दोस्ती, दुखी इंसान, हेराइ गई बरखा, मजूरी, नामी मरै नाव का, सूझबूझ, करतब, सुख कै चाहत, मंत्र कै ताकत, जादुई मोती, बिरवा पूत, बारह लखन्दर एवं तपस्वी सिंह वैद्य का भी अपना एक सार्थक संदेश है।

‘सोने मा सोहागा’ को पढ़ते हुए मुझे कथा सम्राट प्रेमचंद की याद आती है। डॉ अर्जुन पांडेय ने अपनी कहानियों को प्रेमचंद की शैली की तरह रचा है। मुंशी प्रेमचंद ने सामंत मजदूर और किस के संबंधों पर आधारित देश की ग्रामीण व्यवस्था पर विचार उत्तेजक और भावपूर्ण कहानी लिखी थी, ठीक इस तरह की कहानियां ‘सोने मा सोहागा’ में मिलती है। रचनात्मक रूप से इस तरह की अनुपम कहानियों के माध्यम से अवधी भाषा का परचम फहराने के लिए लेखक डॉ अर्जुन पांडेय को ढेर सारी शुभकामनाएं और बधाई।

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