सगीर अंसारी / मुंबई
परेल के ग्लेनेईगल्स अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहाँ वरिष्ठ रोबोटिक सर्जन डॉ. जिग्नेश गांधी के नेतृत्व में पश्चिम भारत की पहली मीडियन आर्कुएट लिगामेंट सिंड्रोम (एम.ए.एल.एस.) की रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गई।
यह एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है, जो एक लाख में केवल एक-दो लोगों को होती है। सर्जरी के लिए दा विंची एक्स-आय रोबोटिक प्रणाली का इस्तेमाल किया गया।
चुनाभट्टी के 60 वर्षीय मरीज को वर्षों से भोजन के बाद पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। कई अस्पतालों में इलाज के बावजूद जब राहत नहीं मिली, तो ग्लेनेईगल्स में उनका सही निदान हुआ और उपचार संभव हुआ।
डॉ. गांधी ने बताया, यह सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। रोबोटिक तकनीक से सटीक नियंत्रण और 3डी दृष्टि मिलती है, जिससे इलाज और भी सुरक्षित बनता है। आमतौर पर ऐसी सर्जरी में 2-3 घंटे लगते हैं, लेकिन ग्लेनेईगल्स टीम ने इसे सिर्फ 48 मिनट में पूरा किया। मरीज अगले ही दिन चलने-फिरने और सामान्य भोजन करने लगा। अस्पताल के सीईओ डॉ. बिपिन चेवले ने कहा, हमारा लक्ष्य मरीजों को आधुनिकतम तकनीक से सुरक्षित उपचार देना है। यह सफलता उसी दिशा में बड़ा कदम है।
मरीज महेंद्र सावंत ने खुशी जताते हुए कहा, अब मैं बिना दर्द के खा सकता हूँ, जी सकता हूँ। यह मेरे लिए नया जीवन है। यह उपलब्धि पश्चिम भारत में रोबोटिक सर्जरी की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई है।
