फिरोज खान
प्यार में इनकार मिला तो जान ले ली। कांदिवली में एक बार फिर एकतरफा प्यार खून में बदल गया। आरोपी युवक ने महीनों तक युवती का पीछा किया। जब युवती ने रिश्ते से साफ इनकार कर दिया, तो गुस्से में आकर उसने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कोई अकेली घटना नहीं है। वर्ष २०२३ से २०२६ के बीच मुंबई में एकतरफा प्यार, रिश्ता ठुकराए जाने और जुनून से जुड़ी करीब १४ हत्या और गंभीर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में जान-पहचान वाले आरोपियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अधिकांश मामलों में आरोपी १८ से ३० वर्ष आयु वर्ग के युवक हैं। सोशल मीडिया, रील्स और फिल्मों ने कई युवाओं के मन में यह गलत सोच पैदा कर दी है कि ‘प्यार का मतलब किसी पर अधिकार जमाना है।’ जैसे ही उन्हें ‘न’ सुनने को मिलती है, वे इसे अपनी बेइज्जती समझ बैठते हैं। इसके बाद गुस्सा, हिंसा और आखिरकार अपराध की राह पकड़ लेते हैं। कई बार युवतियां डर या बदनामी के भय से शुरुआती शिकायत ही नहीं करतीं। पीछा करना (स्टॉकिंग), धमकी देना और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से लगातार संदेश भेजना तब तक चलता रहता है, जब तक मामला गंभीर नहीं हो जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलिंग अनिवार्य होनी चाहिए। बच्चों को यह सिखाना होगा कि रिजेक्शन भी जिंदगी का हिस्सा है। गुस्से पर नियंत्रण और भावनात्मक संतुलन जैसे विषयों को भी शिक्षा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। माता-पिता को भी अपने बच्चों की दोस्ती, मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों पर संतुलित नजर रखनी चाहिए। यदि किसी में जुनूनी व्यवहार दिखाई दे, तो समय रहते उससे बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें। पीछा करना, धमकी देना और उत्पीड़न करना कानूनन अपराध है। पीड़िता या गवाह को तुरंत ११२, १८१ महिला हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करना चाहिए। चुप्पी अक्सर अपराधियों का हौसला बढ़ाती है।
मुंबई पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। शिकायत मिलते ही तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्यार सम्मान मांगता है, जबरदस्ती नहीं। ‘ना’ का मतलब हमेशा ‘ना’ ही होता है। किसी की जान लेना प्यार नहीं, बल्कि कायरता और गंभीर अपराध है। यदि आपके दोस्त, भाई या परिचित में ऐसा जुनून दिखाई दे, तो उसे रोकिए, समझाइए और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेने की सलाह दीजिए। कांदिवली की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सम्मान, सहमति और सीमाओं की शिक्षा घर और स्कूल, दोनों जगह से शुरू होनी चाहिए। तभी ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
