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अब जौहर युनिवर्सिटी पर बुल्डोजर?..ताकि लोग अनपढ़ और जाहिल रहें, बीजेपी सत्ता में बनी रहे!

अरुण कुमार गुप्ता

भाजपा सरकार की आजम खान से दुश्मनी तो समझ में आती है। भाजपा को अपने पारंपरिक वोट बैंक का ध्रुवीकरण करना था। यह बात भी समझ में आती है। इसके लिए आजम खान की दुर्गति जरूरी थी। यह बात भी समझ में आती है, लेकिन आजम खान द्वारा बनाई गई जौहर यूनिवर्सिटी को जमींदोज करना कहां तक उचित है? क्या इससे सिर्फ मुसलमानों का नुकसान होगा या पूरे देश का नुकसान होगा?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कह रही है कि जौहर यूनिवर्सिटी की इमारत का नक्शा पास नहीं हुआ था। चलो मान लिया कि नक्शा पास नहीं हुआ था। तो भी क्या उसको गिराया जाना न्यायोचित है? जबकि यूनिवर्सिटी पर फाइन लगाकर नक्शा आराम से पास किया जा सकता है। यदि जिद्द यही है कि नक्शा पास के बिना यूनिवर्सिटी की इमारत गिराना है तो यह नियम सिर्फ जौहर यूनिवर्सिटी पर ही क्यों लगाया जा रहा है? यह नियम तो देश के हर इंस्टिट्यूट पर लगा दीजिए। सारी बिल्डिंगों पर लगा दीजिए। देश की सभी बिल्डिंगों पर लगा दीजिए। ताकि सब जगह खंडहर ही खंडहर नजर आएं और यह काम बीजेपी के लिए मुश्किल भी नहीं है। जब जम्मू के माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी में मुसलमान बच्चों के ज्यादा एडमिशन पर एमबीबीएस की मान्यता रद्द की जा सकती है तो बाकी स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को खंडहर बनाना कौन सा बड़ा काम है? सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने के बजाय उसे टेकओवर भी कर सकती थी। जब यह काम भी नहीं किया जा सकता, तो पूरा देश अडानी-अंबानी के नाम कर दिया गया है तो इस यूनिवर्सिटी को भी इन्हीं उद्योगपतियों के नाम कर देना चाहिए था, लेकिन नहीं, इस सरकार को दर्द है कि यूनिवर्सिटी को एक मुसलमान ने बनाया है और इस यूनिवर्सिटी में गरीब और अनाथ बच्चों के पढ़ने का बंदोबस्त कर दिया गया था। सच तो यह है कि देश में जो आज सरकार है वह न तो हिंदू और न ही मुसलमान को पढ़ने-लिखने देखना चाहती है।
याद कीजिए आजम खान का भाषण
आज जौहर यूनिवर्सिटी बनाने वाले आजम खान का एक भाषण याद आ रहा है जिसमें मंच से वे लोगों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं,
‘जमाना तुम्हें आज अनपढ़ और जाहिल देखना चाहता है। हिंदुस्थान की मुस्तगील का हिस्सा नहीं बनने देना चाहता। अगर तुम भी अपने बारे में नहीं सोचोगे तो सात समुंदर पार से कोई तुम्हारा हाथ पकड़ कर कलम देने नहीं आएगा।’
आजम खान जब यह भाषण दे रहे थे तो वे सिर्फ मुसलमान को संबोधित नहीं कर रहे थे, लेकिन यह सरकार न ही हिंदू और न ही मुसलमान को पढ़ने-लिखने देखना चाहती है। असल में यह सरकार स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी की जगह मंदिर बनवा देना चाहती है ताकि वह चढ़ावा चोरी करती रहे और देश की जनता गाय-गोबर, हिंदू-मुसलमान करती रहे और यह लोग हमेशा सत्ता में बने रहें। क्योंकि लोग पढ़-लिख जाएंगे तो अपने हक की बात करने लगेंगे। अब यह देखना होगा कि देश के लोग खासतौर से यूपी के लोग सरकार के इस रवैया का विरोध करेंगे या फिर स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटियों को बचाने के लिए आवाज उठाएंगे?

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