-भरतकुमार सोलंकी
मारवाड़ी समाज में अक्सर कहा जाता है, ‘खरी मेहनत का पैसा है तो टिकेगा, नहीं तो जैसे आया है वैसे ही चला जाएगा।’ लेकिन क्या हमने इस कहावत का अर्थ अगली पीढ़ी तक पहुंचाया? वर्षों मेहनत करके कारोबार खड़ा किया, बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई और जब बच्चा पढ़-लिखकर बाहर निकला तो उसे उसके स्किल, प्रोफेशन और विशेषज्ञता पर काम करने के बजाय आईपीओ, एफएंडओ, एमसीएक्स और कमोडिटीज की दुनिया में उतार दिया। सवाल है-क्या यह बच्चे को आर्थिक स्वतंत्रता की ओर ले जाना है या आसान कमाई के भ्रम की ओर?
जिस बच्चे ने इंजीनियरिंग की है, उसे इंजीनियरिंग में अपनी विशेषज्ञता बढ़ाने की जरूरत है। जिसने चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कानून, मेडिकल, टेक्नोलॉजी या किसी अन्य क्षेत्र में शिक्षा ली है, उसे अपने ज्ञान को व्यवसाय और आय में बदलना चाहिए। लेकिन यदि माता-पिता ही कहते हैं, ‘नौकरी या प्रोफेशन बाद में देखना, पहले आईपीओ भर, ट्रेडिंग कर, एफएंडओ कर और पैसा बना’, तो क्या हम उसकी असली क्षमता का इस्तेमाल कर रहे हैं? आईपीओ अपने आप में गलत नहीं है और पूंजी बाजार में दीर्घकालीन निवेश भी आर्थिक नियोजन का हिस्सा हो सकता है। समस्या तब शुरू होती है, जब निवेश और ट्रेडिंग का अंतर मिट जाता है और कम समय में बड़ा पैसा बनाने की मानसिकता पैदा होती है। मार्जिन मनी का खेल तो और गंभीर है। अपनी छोटी पूंजी के आधार पर उससे कई गुना बड़े सौदे किए जा सकते हैं। सौदा सही निकला तो मुनाफा आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन विपरीत दिशा में बाजार गया तो नुकसान भी उसी अनुपात में बढ़ सकता है। फिर नुकसान भरने के लिए दोस्त से उधार, रिश्तेदार से कर्ज, साहूकार से पैसा और अंतत: कारोबार या संपत्ति बेचने तक की नौबत आ सकती है। क्या हमने ऐसे परिवार नहीं देखे हैं, जिन्होंने वर्षों की कमाई बाजार के नुकसान की भरपाई में लगा दी? क्या कर्ज का ब्याज चुकाते-चुकाते मूल पूंजी भी खत्म नहीं हुई? और जब आर्थिक दबाव असहनीय हो जाए, तो मानसिक संकट भी गहरा सकता है-ऐसी परिस्थितियों में व्यक्ति को अकेला छोड़ना नहीं, बल्कि परिवार और विशेषज्ञ सहायता तक पहुंचाना जरूरी है।
तो फिर सवाल माता-पिता से है-बच्चे को करोड़ों का सौदा करने के लिए पैसा देने से पहले क्या आपने उसे अपनी क्षमता से करोड़ों कमाने की कला सिखाई? व्यापार में आपकी अगली पीढ़ी आपकी दुकान संभाले या अपना नया व्यवसाय बनाए, लेकिन पहले उसे स्किल, कमाई, बचत और निवेश की सीढ़ी चढ़ने दीजिए।
बच्चे को ट्रेडिंग-सटोरिया का टिकट देने से पहले उसकी प्रतिभा को व्यवसाय का रास्ता क्यों नहीं देते?
सवाल मेरे हैं- जवाब आपके पास हैं।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं।)
